आध्यात्मिक- भागवत में राधा-कृष्ण की भक्ति में रमे श्रद्धालु, मनुष्य अपने शरीर, दिमाग या दिल से भगवान को पा सकता है

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भागवत में राधा-कृष्ण की भक्ति में रमे श्रद्धालु

भागवत का तीसरा दिवस गुरु महिमा पर केंद्रित रहा

दीपक सिर्फ बाहर का अंधकार मिटा सकता है लेकिन भीतर का अंधेरा मिटाने के लिए गुरु ही जरूरी हैं- नमन कृष्ण

नव साँस्कृतिक सत्संग समिति, शेर का डांडा द्वारा नैनीताल में आयोजित श्री मद भागवत के तृतीय दिवस की कथा में गुरु महिमा का विशेष उल्लेख रहा।

भागवत किंकर नमन कृष्ण जी महाराज ने कहा कि प्रकाश की अनुपस्थिति ही अंधेरा है और उस अंधेरे से बाहर लाने में सद गुरु की भूमिका बहुत बड़ी है। इसलिए किसी को अपना गुरु मानकर ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

जिस प्रकार सद गुरु मनुष्य को उत्कर्ष की तरह ले जाता है उसी प्रकार समाज को सही दिशा देकर व्यक्ति के विकास में गुरूओं की अद्वितीय भूमिका है।

भागवत कथा को संगीत के मधुर स्वरों के साथ हृदय स्पर्शी बनाते हुए वृंदावन से आए संगीतकार विमल दास द्वारा वायलिन और बांसुरी में तथा तबले में छोटू शरण शर्मा के साथ हार्मोनियम एवं गायन में रवि शास्त्री द्वारा योगदान दिया जा रहा है। जबकि साउंड सिस्टम में देवेन्द्र भाई सहयोग कर रहे हैं।

दैनिक पूजन अर्चन में पंo बृजेश शास्त्री एवं गिरीश भट्ट के मार्गदर्शन में तृतीय दिवस पर दस यजमानों में खुशहाल रावत, पी सी पांडे, कंचन चंदोला, कैलाश जोशी, इन्दर सिंह रावत, ललित चंद्र पांडे, दीपक पांडे, ललित गोस्वामी, दिनेश पांडे, मोहन जोशी, विपिन चंद्र पंत द्वारा सपत्नीक योगदान दिया गया।

भागवत के भव्य एवं सफल आयोजन में लक्ष्मण सिंह रावत, महावीर बिष्ट, दीपक जोशी, घनानंद भट्ट, उरवादत्त जोशी, विपिन चंद्र पांडे, डॉo हिमांशु पांडे, विकास बड़ोला, गौरव, दिव्यांशु रावत बबलू, बीज्जी बिष्ट, राजेश पांडे आदि द्वारा स्वयं सेवक के रूप में योगदान दिया जा रहा है।

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