उत्तराखंड की औषधीय गुणों से भरपूर अरबी, क्या है खूबी आप भी जानके हो जाएंगे हैरान ?

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अरबी का वानस्पतिक नाम कोलोकेसिया एस्कुलेन्टा यह वानस्पातिक कुल ऐरेसी से संबंधित है। स्थानीय नाम- कुचैं, कुचंई, अरबी, अरवी व एक दूसरी प्रजाति पिंडालु या गडेरी, घुइंया, पातुड़ या गाबा भी कहते हैं। गहरे रंग के पत्ते तथा डंठल वाले अरबी के कंद तथा हल्के हरे डंठल व पत्तो वाले घुइंया के पत्तों का उपयोग अधिक किया जाता है।हिन्दी में इसे अरुई, घुइयां, कच्चु, अरवी, घूय्या; संस्कृत में कच्चु या आलुकी तथा अग्रेंजी में इजिप्टियन ऐरम क्रैच कोको टैरो रूट एड्डोस, एलिफैन्टस् इयर कोको, टैरो कहते हैं। अरबी उष्णकटिबन्धीय व प्राचीनकाल से उगाये जाने वाली अत्यन्त प्रसिद्ध और सभी की परिचित वनस्पति है। भारत में लगभग सभी गर्म प्रदेशों, एवं हिमालय के आर्द्र, तथा सूखे भागों में अरबी की खेती की जाती है।अरबी को 2500 मीटर की ऊंचाई तक उगाया जाता है। इसकी खेती इसके कंद (जिसका उपयोग सब्जी की तरह होता है) के लिए की जाती है। अरबी के पत्ते, और कंद में कैल्शियम ऑक्जलेट होता है, जिसके सेवन से गले, तथा मुंह में सुई चुभने जैसी खुजली हो सकती है। इसलिए अरवी का सेवन पानी में उबालकर ही करें। हालांकि ये लवण पकने पर नष्ट हो जाता है। या इनको रात भर ठण्डे पानी में रखने पर भी नष्ट हो जाता है।अरबी प्रकृति ठण्डी होती है इसलिए पकाते समय इसमें अजवायन भी डाली जाता है। अरबी कन्द (फल) कोमल पत्तों और पत्तों की तरकारी बनती है। बरसात के दिनों में अरबी के पत्तों से पतोड़ बनाकर खाने का है। अरबी आसानी से बाजार में मिल जाती है। अरबी गर्मी और वर्षा की ऋतु में होती है। अरवी के लिए पर्याप्त जीवांश और उचित जल निकास युक्त रेतीली दोमट भूमि उपयुक्त है। अरबी रक्तपित्त को मिटाने वाली, दस्त को रोकने वाली और वायु को प्रकोप करने वाली है।अरबी के पत्तों में मौजूद विटामिन ए की भरपूर मात्रा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों की कोशिकाओं के ल‍िए अच्छे साबित हो सकते हैं। यह आँखों की रोशनी तेज बनाये रखने के साथ-साथ मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), अंधापन और मोतियाबिंद जैसी आंखों की विभिन्न समस्याओं की रोकथाम में मदद करता है। अरबी के पत्तों और कन्द की सब्जी बनाकर सेवन करने से आंखों के रोग में फायदा होता हैअरबी खाने के फायदे ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक है। अरबी में संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) की मात्रा बहुत कम होती है। यही वजह है कि इसका सेवन हृदय के लिए फायदेमंद माना जाता है। अरबी के पत्तों में मौजूद मेथियोनीन और फाइबर, ट्राइग्लिसराइड को तोड़कर कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। अरबी में सोडियम की भी अच्छी मात्रा पायी जाती है। सोडि‍यम के अलावा पोटैशियम और मैग्नीशि‍यम से भी अरबी भरपूर है अपने इन्हीं गुणों के चलते अरबी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए भोजन में अरबी के पत्तों को नियमित रूप से शामिल है। अरबी भूख को कंट्रोल करने में मददगार है। अरबी में काफी मात्रा में फाइबर होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाते हैं। यह प्रकिया वजन को तेजी से कम करने में मददगार होती है। इन पत्तों में कैलोरी बहुत कम होती है लेकिन इसके सेवन से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त हो जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद आयरन तत्व शरीर के लिए हीमोग्लोबिन के अनिवार्य घटक में से एक है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुँचाने का काम करता है। एनीमिया (शरीर में आयरन की कमी) से पीड़ित लोगों को रोजाना अरबी या इसके पत्तों का सेवन करना चाहिए। इससे न सिर्फ आयरन की कमी पूरी होती है बल्कि थकान और कमजोरी से भी बचाव होता है।अरबी के पत्ते का उपयोग करें झुर्रियों को दूरने में भी किया जाता है। अरबी में एक एमिनो एसिड थ्रेओनिन की भरपूर मात्रा पाई जाती है। यह कोलेजन और इलास्टिन बनने में मदद करता है और ये दोनों स्वस्थ त्वचा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पहाड़ की पिनालू को भारत के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। इसे अरबी भी कहा जाता है। कुछ लोग इसके पत्तों की पकौड़ी बनाकर खाना पसंद करते हैं तो कुछ इसकी सब्जी, कई जगहों पर तो इसे व्रत में फलाहार के रूप में भी खाई जाती है। अरबी जाड़ों में खाई जाने वाले लोकप्रिय सब्जी है, जिसके फायदे भी चौकाने वाले हैं। ये फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होती है. अरबी के हरे पत्ते β-कैरोटीन, एस्कॉर्बिक एसिड, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, बी-विटामिन, विटामिन ए,β-साइटोस्टेरॉल और स्टेरॉयड जैसे खनिज और कैल्शियम, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम का एक समृद्ध स्रोत हैं।अरबी के पत्तों में फ्लेवोनोइड्स, फाइटोकैमिकल्स और एंथोसायनिन होते हैं।भारत में अरबी के पत्तों के औषधीय गुणों पर बड़े पैमाने पर शोध किया गया है। अरबी के पौधे के कंद, पत्ते,डंठलों में विभिन्न औषधीय गुण होते हैं। इसके पत्तों में फ़िनोलिक फ्लेवोनोइड वर्णक एंटीऑक्सिडेंट जैसे c-कैरोटीन और क्रिप्टोक्सैंथिन, विटामिन ए के साथ होते हैं’।एक सौ ग्राम ताज़ा अरबी के पत्तों में दैनिक आवश्यकता के लिए 4825 IU या 161% विटामिन ए पाया जाता है।अरबी के पत्‍तों में मौजूद थियोनिन नामक एमिनो एसिड की अच्‍छी मात्रा होती है। यह कोलेजन और इलास्टिन के गठन में मदद करता है। स्वस्थ त्वचा और दृष्टि के लिए इन यौगिकों की आवश्यकता होती है।इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। पिनालू 20 से 30 रुपये प्रतिकिलोग्राम है। पहाड़ की संस्कृति के खान-पान की बात ही अलग है. यहां के अनाज तो गुणों का खान हैं ही, सब्जियां भी पौष्टिक तत्वों से भरपूर है. ऐसी ही खास पहाड़ी सब्जी है अरबी की कम लोकप्रियता का एक कारण यह है कि इसमें कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल जैसे पोषण विरोधी कारक होते हैं, जो खाना पकाने के दौरान ठीक से संसाधित नहीं होने पर जलन पैदा करेंगे।उत्तराखंड में जन-जन के लिए पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने की दृष्टि से विभिन्न पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर अरबी के उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला लेखक के निजी विचार हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरतहैं

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