प्यार और सम्मान दो ऐसे तोहफे हैं यदि आप किसी को देने लगे तो इंसान ही क्या बेजुबान भी झुक जाता है

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प्यार और सम्मान दो ऐसे तोहफे हैं यदि आप किसी को देने लगे तो इंसान ही क्या बेजुबान भी झुक जाता है।,,,,,,,,, कहते हैं कि बेजुबान प्राणी भी प्यार की भाषा भली-भांति समझते हैं। पशु एवं पक्षी बेजुबान अवश्य होते हैं परंतु उनके अंदर भी भावनाएं होती हैं। वह भी सुख दुख प्रेम संवेदना और क्रूरता में अंतर समझते हैं। और इन्हें महसूस भी कर सकते हैं । यदि इन्हें प्रेम और अपनापन मिले तो उनके साथ गहरा रिश्ता बनाया जा सकता है। इंसान की तरह पशु-पक्षी भी नफरत और प्रेम की भाषा समझते हैं। आप उनके साथ जैसा व्यवहार करते हैं उन्हें यह अनुभव हो जाता है कि आप उनसे प्यार करते हैं या नफरत करते हैं। यदि आप उनसे प्यार करते हैं तो आपके पास आएंगे आपके आसपास नाचेंगे लेकिन अगर आप उनसे घृणा करते हैं तो आपका चेहरा देखते ही भाग जाएंगे। पशु पक्षियों में भी मनुष्य की भांति प्रेम की भावना होती है। इसीलिए तो पशु पक्षी समूह में रहते हैं एवं प्रकृति के नियमों के अनुसार चलते हैं। अकारण किसी पर हमला नहीं करते। यदि कभी कभार हमला करते भी हैं तो सिर्फ इस कारण से ताकि दूसरे से उन्हें हानि ना हो पालतू पशु पक्षी भी मनुष्य के साथ प्रेम भाव से बंध जाते हैं। उनके लिए अपने प्राणों तक न्योछावर कर देते हैं। भगवान ने 8400000 योनियों में मनुष्य को सबसे अधिक ज्ञान दिया है। मनुष्य को मनुष्य जैसा व्यवहार करना चाहिए। सिर्फ आपस में ही नहीं वरन पशु पक्षियों के साथ भी प्रेम व्यवहार करना चाहिए। परंतु मनुष्य विश्व का सबसे खतरनाक जानवर है जो इतना सब कुछ जानते समझते हुए भी नासमझ जैसा व्यवहार करता है। दिखावे के लिए जिन पशु पक्षियों को बड़े लाड प्यार से पालता है 1 दिन उसी को मारकर खा जाता है। हमें चाहिए कि प्रत्येक पशु पक्षी जीव जंतु यहां तक कि पेड़ पौधों से भी प्यार करना चाहिए प्रकृति मात्र से प्यार करना चाहिए। प्रत्येक जीव सुख दुख का अनुभव करते हैं यहां तक की पेड़ पौधे भी सुख-दुख की अनुभूति करते हैं। विज्ञान भी इस बात को मानता है। विज्ञान ने भी यह सिद्ध कर दिया है। हमारे वैज्ञानिक श्री जगदीश चंद्र बसु जी के अनुसार भी पेड़ पौधे सुख एवं दुख की अनुभूति करते हैं। हां इतना अवश्य है वह हमारी भांति हंसते रोते नहीं हैं। अनेकों जीव तो रोते भी हैं आपने कुत्ते को रोता हुआ देखा होगा। भालू भी रोता है इसके अतिरिक्त कई और जीव भी रोते हैं प्रत्येक जीव के दुख व्यक्त करने की विधि भिन्न-भिन्न होती है। यह आवश्यक नहीं है कि उनके भी हमारी तरह आंसू ग्रंथि हो। वह भी आंसू बहाए। वह तो मात्र स्वर निकालकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं। हमारी दुनिया बहुत बड़ी है जिसमें सभी जीव जंतुओं के सुख एवं दुख प्रकट करने के भिन्न भिन्न प्रकार हैं। इस दुनिया में एक ऐसा पक्षी भी है जिसे सारस कहते हैं। यह अत्यधिक ऊंची उड़ान भरते हैं। यदि सारस के जोड़े में से किसी एक सारस पक्षी की मृत्यु हो जाए तब दूसरा सारस भी उसके वियोग में प्राण त्याग देता है। पशु एवं पक्षियों की भाषा हम भी समझ सकते हैं परंतु इसके लिए हमें नियम एवं धर्म से रहना है। जीवो पर दया करनी सीखनी है। तब जाकर हम सहजता से पशु पक्षी भाषा सीख सकते हैं। हमारे प्राचीन सनातन धर्म ग्रंथों में इसके अनेकों उदाहरण है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी श्री राम चरित्र मानस में लिखा है की एक कौवे ने भरत जी के आगमन की सूचना दी थी उसकी भाषा भगवान श्री राम जी समझते थे और सभी नगरवासी भी समझते थे। कौवे का कहा हुआ शुभ समाचार पाकर सब नगरवासी भरत जी के स्वागत के लिए एकत्र हुए थे। इसके अतिरिक्त भी हजारों लाखों उदाहरण हमारे वेद पुराणों में मिलते हैं। जब भगवान श्री राम जी सीता माता की खोज में जा रहे थे वह भी पशु पक्षियों से उनका पता पूछ रहे थे कि क्या उन्होंने सीता जी को कहीं देखा? लंगूर बंदर भालू नल नील जटायु गिलहरी आदि सब सीता माता की खोज में सहायक भी बने। लेखक श्री पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल ।

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