बहुत महत्वपूर्ण है फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की विनायकी चतुर्थी

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बहुत महत्वपूर्ण है फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की विनायकी चतुर्थी।,,,,,,,,, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी कहते हैं। इस बार यह विनायकी चतुर्थी दिनांक 6 मार्च 2022 दिन रविवार को पड़ रही है।
विनायकी चतुर्थी की पूजा विधि,,,,,,, विनायकी चतुर्थी पर प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें पवित्र जल श्रोत पर स्नान कर या घर में जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। सर्वप्रथम भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। ओम सूर्याय नमः मंत्र का जप करें। तदुपरांत घर के मंदिर में गणेश जी की प्रतिमा पर शुद्ध जल चढ़ाएं तदुपरांत पंचामृत अर्पित करें पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं तदुपरांत भगवान गणेश जी का षोडशोपचार पूजन करें। भगवान गणेश जी को दूर्वा के साथ-साथ शमी के पत्ते भी अवश्य चढ़ाएं। दो दो दुर्वा करके 11 जोड़े तैयार करके 11 जोड़ी दुर्वा गणेश जी को मंत्र उच्चारण सहित चढ़ाएं ध्यान रहे दुर्वा किसी साफ जगह उगी हुई होनी चाहिए या मंदिर के आसपास या गमले में उगाए रखें। गंदगी वाली जगह से दुर्वा नहीं लेनी चाहिए।
निम्न मंत्रों का जाप करें, ,,,,,,,,, ओम गं गणपतए नमः ओम गंणाधिपाय नम:। ओम विनायकाय नमः। ओम ईशपुत्राय नमः । ओम सर्व सिद्धि प्रदायकाय नमः। ओम एकदंताय नमः। ओम मूषक वाहनाय नमः। ओम कुमार गुरुवे नमः।
विनायक चतुर्थी व्रत कथा।, ,,,,,,,, एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान भोले शंकर के साथ चौपड़ खेलने की इच्छा जताई। शिवजी ने चौपड़ खेलना प्रारंभ किया। लेकिन इस खेल में समस्या यह थी कि हार और जीत का फैसला कौन करेगा? इसके लिए घास फूस से एक बालक बनाकर उसमें प्राण प्रतिष्ठा करा के उस बालक से कहा गया कि तुम हार जीत का फैसला करना। इसके बाद तीन बार माता पार्वती इस खेल में विजयी हुई। परंतु उस बालक ने कहा कि महादेव जी विजयी हुए हैं। इस बात पर माता पार्वती को अत्यधिक क्रोध आया। और उन्होंने उस बालक को कीचड़ में रहने का श्राप दिया। बालक ने अपनी इस गलती हेतु कई बार क्षमा याचना की तब फिर माता पार्वती को बालक पर दया आ गई उन्होंने कहा कि 1 वर्ष बाद इस जगह में नागकन्या आएंगी। उनके कहे अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत करने से तुम्हारे कष्ट दूर होंगे। तदुपरांत उस बालक ने गणेश जी की उपासना की और भगवान गणेश जी प्रसन्न हो गए। गणेश जी ने उसे अपने माता पिता यानी कि भगवान भोले शंकर एवं माता पार्वती को देखने के लिए कैलाश जाने का वरदान भी दिया। बालक कैलाश पहुंच गया वही माता पार्वती को मनाने के लिए शिव जी ने भी 21 दिन तक गणेश व्रत किया और पार्वती जी मान गई। इसके बाद माता पार्वती ने भी अपने पुत्र से मिलने के लिए 21 दिन तक व्रत किया और उनकी यह इच्छा भी पूरी हो गई। ऐसा माना जाता है वही बालक कार्तिकेय जी हैं।
विनायक चतुर्थी का महत्व, ,,,,,, विनायक चतुर्थी पर श्री गणेश जी की पूजा दिन में दो बार की जाती है। प्रथम बार दोपहर में मान्यता है कि विनायकी चतुर्थी के दिन व्रत करने और इस दिन गणेश जी की उपासना करने से घर में सुख समृद्धि आर्थिक संबंध संपन्नता के साथ-साथ ज्ञान एवं बुद्धि प्राप्ति होती है। चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा से भी सभी कार्य सिद्ध होते हैं। एवं सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विनायक चतुर्थी के बारे में मान्यता है कि इसके प्रभाव से जीवन में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं इसके अतिरिक्त इस व्रत को विधिपूर्वक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन गणपति की पूजा करने से सुख समृद्धि धन दौलत के साथ ही ज्ञान एवं बुद्धि की भी प्राप्ति होती है।
शुभ मुहूर्त।, ,,,,,,,, इस बार सन् 2022 में फाल्गुन विनायकी चतुर्थी दिनांक 6 मार्च 2022 दिन रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन चतुर्थी तिथि छत्तीस घड़ी 32 पल तक है। यदि नक्षत्रों की बात करें तो इस दिन अश्वनी नामक नक्षत्र है। जो 53 घड़ी 14 पल तक रहेगा तदुपरांत भरणी नामक नक्षत्र उदय होगा। इस दिन बव नामक करण है जो पांच घड़ी 43 पल तक रहेगा बात यदि चंद्रमा की स्थिति की करें तो इस दिन चंद्रदेव पूर्णरूपेण मेष राशि में रहेंगे। लेखक पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल

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