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कामना पूर्ण करने वाली होती है कामिका एकादशी व्रत। कामिका एकादशी व्रत इस बार बुधवार 4 अगस्त 2021 को है। कामिका का अर्थ है कामना पूर्ण करने वाली। इस बार कामिका एकादशी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है। ऐसा शुभ मुहूर्त वर्षों बाद आता है। सावन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहते हैं। इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। क्योंकि इस समय चातुर्मास चल रहा है। अतः भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा की जाती है। अब यदि बात करें मुहूर्त की तो पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि दिन मंगलवार 3 अगस्त के दिन दोपहर 12:58 से हो रहा है और तिथि का समापन बुधवार दिनांक 4 अगस्त को दोपहर 3:16 पर हो रहा है। इसलिए उदया तिथि के अनुसार यह व्रत दिनांक 4 अगस्त 2021 बुधवार के दिन ही रखा जाएगा। संयोग की बात है कि दिनांक 4 अगस्त 2021 को प्रातः काल 5:00 बज कर 44 मिनट से दिनांक 5 अगस्त 2021 को प्रातः 5:24 तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। इससे इस व्रत की महत्ता कुछ और बढ़ जाएगी। कामिका एकादशी व्रत कथा। एक बार कुंती पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी अर्थात कामिका एकादशी व्रत के बारे में पूछा कि हे भगवान आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी तथा चातुर्मास महात्म्य मैंने भली प्रकार से सुना। अब कृपा करके सावन कृष्ण एकादशी का क्या नाम है वह बताइए। श्री कृष्ण भगवान कहने लगे की है धर्मराज इस एकादशी की कथा इस प्रकार है। एक समय स्वयं ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद से कही थी वही कथा मैं तुमसे कहता हूं। नारद जी ने ब्रह्मा जी से पूछा था की है पितामह सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनने की मेरी इच्छा है। उसका क्या नाम है? क्या विधि है और उसका महत्व में क्या है? तो कृपा करके बताइए। नारद जी के यह वचन सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा हे नारद लोगों के हित के लिए आपने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। सावन मास की कृष्ण पक्ष एकादशी का नाम कामिका एकादशी है। उसके सुनने मात्र से ही वाजपेई यज्ञ का फल मिलता है। इस दिन शंख चक्र गदा धारी विष्णु भगवान का पूजन होता है। जिनके नाम श्रीधर हरि, विष्णु माधव मधुसूदन है। उनकी पूजा करने से जो फल मिलता है सो सुनो। जो फल गंगा काशी नैमिषारण्य और पुष्कर मैं स्नान से मिलता है वह विष्णु भगवान के पूजन से मिलता है। जो फल सूर्य व चंद्र ग्रहण पर कुरुक्षेत्र और काशी में स्नान करने से, समुद्र वन सहित पृथ्वी दान करने से सिंह राशि के बृहस्पति में गोदावरी और गंडकी नदी में स्नान से भी नहीं प्राप्त होता वह भगवान विष्णु के पूजन से सहज में मिलता है। जो मनुष्य सावन में भगवान का पूजन करते हैं उनसे देवता गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। अतः पापों से डरने वाले मनुष्य को कामिका एकादशी का व्रत और विष्णु भगवान का पूजन अवश्य करना चाहिए। पाप रूपी कीचड़ में फंसे हुए और संसार रूपी समुद्र में दूबे मनुष्य के लिए इस एकादशी का औरत और भगवान विष्णु का पूजन अत्यंत आवश्यक है। इससे बढ़कर पापों के नाश ओं का कोई उपाय नहीं है। हे नारद स्वयं भगवान ने यही कहा है कि कामिका व्रत से जीव बुरी योनि को प्राप्त नहीं होता है। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन भक्ति पूर्वक तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पण करते हैं वह इस संसार के समस्त पापों से दूर रहते हैं। विष्णु भगवान रत्न मोती मणि तथा आभूषण आदि से इतने प्रसन्न नहीं होते जितने की तुलसीदल से होते हैं। तुलसी दल पूजन का फल चार भार चांदी और एक भार स्वर्ण के दान के बराबर होता है। हे नारद मैं स्वयं भगवान की अति प्रिय तुलसी को नमस्कार करता हूं। तुलसी के पौधे को सींचने से मनुष्य की सब यातनाएं नष्ट हो जाती हैं। दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते हैं। और स्पर्श से मनुष्य पवित्र हो जाता है। कामिका एकादशी की रात्रि को दीपदान तथा जागरण के फल का महात्म्य चित्रगुप्त भी नहीं कह सकते। जो इस एकादशी की रात्रि को भगवान के मंदिर में दीपक जलाते हैं उनके पित्र स्वर्ग लोक में अमृत पान करते हैं। तथा जो भी या तेल का दीपक जलाते हैं वह 100 करोड़ दीपक ओं से प्रकाशित होकर सूर्य लोक को जाते हैं। ब्रह्मा जी कहते हैं की हे नारद ब्रह्महत्या तथा भ्रूण हत्या आदि पापों को नष्ट करने वाली इस कामिका एकादशी का व्रत मनुष्य को यत्न के साथ करना चाहिए। कामिका एकादशी के व्रत का महात्म्य श्रद्धा से सुनने और पढ़ने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है। लेखक श्री पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल

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