नैनीताल हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध में जिला न्यायालय के अधिवक्ता लामबंद, आम सभा में आंदोलन की चेतावनी
नैनीताल से संध्या शर्मा की रिपोर्ट
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने की कवायद के बीच विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं। हाईकोर्ट अधिवक्ताओं के बाद अब जिला न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ताओं ने भी शिफ्टिंग के विरोध में खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
गुरुवार को प्रताप भैया सभागार में जिला बार एसोसिएशन नैनीताल की ओर से आयोजित आम सभा में अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को अन्यायपूर्ण और पहाड़ विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ व्यापक रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।
सभा में अधिवक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड का बड़ा भू-भाग पर्वतीय होने के बावजूद राज्य के महत्वपूर्ण संस्थानों को लगातार मैदानी क्षेत्रों की ओर ले जाने की कवायद चिंता का विषय है। जिला बार एसोसिएशन के उप सचिव नीरज गोस्वामी ने कहा कि प्रदेश का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पर्वतीय है, जबकि अधिकांश बड़े संस्थान मैदानी क्षेत्र में केंद्रित हैं। ऐसे में हाईकोर्ट को भी मैदानी क्षेत्र में ले जाने से पहाड़ों से पलायन की समस्या और गंभीर हो सकती है।
पूर्व अध्यक्ष ओंकार गोस्वामी ने कहा कि आंदोलन का कोई भी निर्णय लेने से पहले प्रदेश के सभी संबंधित बार एसोसिएशनों और सहयोगी संगठनों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए, ताकि आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय की जा सके।
पूर्व अध्यक्ष नीरज साह ने हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध को कानूनी स्तर पर मजबूती से उठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में कानूनी विकल्पों और न्यायिक प्रक्रिया का भी गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने कहा कि एसोसिएशन पहाड़ और जनहित के मुद्दे पर अधिवक्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति तय करने के लिए प्रदेश की अन्य बार एसोसिएशनों से भी वार्ता की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त आंदोलन की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
सभा में तरुण चंद्रा, मनीष कांडपाल, अशोक मौलेखी, सोहन तिवारी, रचित तिवारी, भानू प्रताप सिंह मौनी, नवीन पंत, संध्या शर्मा, कैलाश जोशी तथा जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील शर्मा समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने विचार रखे और हाईकोर्ट शिफ्टिंग का विरोध किया।
अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट केवल एक भवन नहीं बल्कि नैनीताल की न्यायिक पहचान और क्षेत्रीय महत्व से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए शिफ्टिंग से जुड़े फैसले में स्थानीय जनता, अधिवक्ताओं, वादकारियों और पर्वतीय क्षेत्र के व्यापक हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।


