मेजर दुर्गा मल्ल की शहादत जांबाजों के लिए प्रेरणा

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मेजर दुर्गा मल्ल की शहादत जांबाजों के लिए प्रेरणा
डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड
जंग-ए-आजादी के निर्णायक संघर्ष में अपने जीवन को देश के लिए न्यौछावर करने वाले उत्तराखंड के महान सपूतों में से एक शहीद मेजर दुर्गा मल्ल भी थे। कई स्वतंत्रता सेनानियों की तरह उन्होंने भी देश की आन बान और शान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। मेजर दुर्गा मल्ल का जन्म देहरादून जनपद के विकास खंड डोईवाला के एक साधारण परिवार में 1913 में हुआ था। 1930 में बाल्यावस्था में दुर्गा मल्ल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आंदोलन से बेहद प्रभावित हुए। उस समय में वह नौंवी कक्षा में पढ़ रह थे। वर्ष 1931 में दुर्गा मल्ल गोरखा राईफल में भर्ती हो गए। नेताजी सुभाष चंद बोस से प्रभावित होकर उन्होंने भारत को स्वतंत्र देखने के लिए ब्रिटिश फौज को छोड़कर 1942 में आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए।27 मार्च 1944 में कोहिमा मणिपुर में आजाद हिंद फौज के लिए जासूूसी करते हुए ब्रिटिश फौज ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेज सरकार ने क्षमा मांगने और भूल स्वीकार करने पर फांसी की सजा माफ कर देने का प्रस्ताव दुर्गा मल्ल के सामने रखा। अंग्रेजी हुकूमत के प्रस्ताव को ठुकराते हुए उन्होंने कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। 25 अगस्त 1944 को देशभक्त दुर्गा मल्ल को अंग्रेजी सरकार द्वारा तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। मेजर दुर्गा मल्ल ने अपने जीवन बलिदान से उत्तराखंड ही नही संपूर्ण राष्ट्र को गौरवान्वित कर दिया। केंद्र सरकार ने शहीद दुर्गा मल्ल की शहादत को नमन करते हुए संसद भवन में उनकी कांस्य प्रतिमा स्थापित की। डोईवाला नगर पालिका में उनका स्मारक बना है। सरकार ने डोईवाला महाविद्यालय और नगर पालिका ने नगर चौक को उनका नाम दिया है। अंग्रेज सरकार ने क्षमा मागने और भूल स्वीकार करने पर फासी की सजा माफ कर देने का प्रस्ताव दुर्गा मल्ल के सामने रखा। अंग्रेजी हुकूमत के प्रस्ताव को ठुकराते हुए उन्होंने कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। 25 अगस्त 1944 को देशभक्त दुर्गा मल्ल को अंग्रेजी सरकार द्वारा तिहाड़ जेल में फासी दी गई। मेजर दुर्गा मल्ल ने अपने जीवन बलिदान से उत्तराखंड ही नही संपूर्ण राष्ट्र को गौरवान्वित कर दिया। सिंगापुर में आजाद हिन्द फौज का गठन किया। जिसमें दुर्गा मल्ल की बहुत सराहनीय भूमिका रही। भारत माता की जय बोलते हुए फांसी के फंदे को चूम लिया।आज उनकी 75 वें बलिदान दिवस पर हमें उनके मातृभूमि की रक्षा के लिए किए गए बलिदान को याद कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए।गोरखा समाज कल्याण समिति के संस्थापक अध्यक्ष ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि गौर का समाज के प्रयास से भारत सरकार ने शहीद दुर्गा मल्ल की विशाल प्रतिमा वर्ष 2004 में संसद भवन में स्थापित की गई जिसपर आज ही के दिन 25 अगस्त को प्रतिवर्ष उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को याद किया जाता है। माँ भारती की स्वतन्त्रता हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले अदम्य साहसी, वीर पराक्रमी, देवभूमि उत्तराखण्ड में जन्मे आजाद हिन्द फौज के प्रथम गोरखा सैनिक, महान क्रांतिकारी और देशभक्त, अमर शहीद मेजर दुर्गा मल्ल जी के शहादत दिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन।

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