आपदा से पहले तैयारी की परख, नैनीताल जिले में पांच स्थानों पर एक साथ हुई मेगा मॉकड्रिल

नैनीताल से अंकिता मेहरा की रिपोर्ट
नैनीताल। मानसून सीजन के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को नैनीताल जिले में व्यापक स्तर पर मेगा मॉकड्रिल आयोजित की गई। जिले के पांच अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन, बाढ़, भू-कटाव और पुल क्षतिग्रस्त होने जैसे काल्पनिक आपदा परिदृश्य तैयार कर राहत एवं बचाव एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया।
मॉकड्रिल की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय कर सभी संबंधित विभागों की टीमों को तुरंत घटनास्थलों के लिए रवाना किया। मल्लीताल के आल्मा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन की स्थिति बनाई गई, जहां एसडीआरएफ, पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, जल संस्थान, विद्युत विभाग, पशुपालन विभाग, जिला पंचायत, 99 माउंटेन ब्रिगेड और एनसीसी कैडेटों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों की सहायता से मलबे में फंसे घायलों को सुरक्षित निकालकर स्टेजिंग एरिया तक पहुंचाया। वहां चिकित्सा, राहत सामग्री, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई गई थीं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभ्यास के दौरान तीन घायलों को उपचार के लिए लाया गया, जिनमें दो को बेहतर इलाज के लिए बीडी पांडे जिला चिकित्सालय भेजा गया, जबकि एक को प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अलग-अलग आपदा परिस्थितियों पर अभ्यास किया गया। बेतालघाट में सड़क पर मलबा आने, कालाढूंगी में पुल क्षतिग्रस्त होने, हल्द्वानी के गौलापार में भू-कटाव तथा लालकुआं में गौला नदी में बाढ़ की काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किया गया। कई स्थानों पर राफ्ट की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास भी किया गया।
जिला प्रशासन ने बताया कि मॉकड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना था, ताकि वास्तविक आपदा आने पर राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी देरी के प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।


