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शारदीय नवरात्र गुरु से शुरू एवं गुरु में पूर्ण,,,,,,,,, जी हां इस बार 8 दिनों में ही पूर्ण हो जाएगी नवरात्र पूजा जैसा कि दुर्गा सप्तशती में कहा गया है दुर्गा सप्तशती के कवच पाठ में उल्लेख है की प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी तृतीय चंद्रघंटेति कुष्मांडलेत चतुर्थकं पंचम स्कंदमातेति षष्ठंकातियाय्नी च सप्तमं कालरात्रि च महागौरी तिचाष्ठितम नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रतेतिता ।। इस बार सन् 2021 में नव दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा 8 दिनों में ही पूर्ण होगी जो गुरुवार से प्रारंभ होकर अगले गुरुवार को पूर्ण होगी। जो 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक होगा। गुरु से ही शुरु और गुरु से ही पूर्ण होंगे। ज्योतिष गणना के अनुसार ऐसा शुभ संयोग बहुत वर्षों बाद आता है जब नवरात्र गुरुवार से प्रारंभ हो और गुरुवार को ही पूर्ण हो। गुरु यानी बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है। वैसे भी गुरु का स्थान शीर्ष चार में तीसरे नंबर पर है माता पिता के बाद गुरु देवता गुरु भगवान से बड़ा है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा कूष्मांडा स्कंदमाता कात्यायनी कालरात्रि महागौरी और सिद्धिदात्री माता की पूजा की जाती है। हमारे हिंदू धर्म ग्रंथ एवं धार्मिक मान्यता के अनुसार इन 9 दिनों तक माता रानी भूलोक में आती हैं। और अपने सभी भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करती है। और भक्तों के सभी दुख दर्द रोग हर लेती है। 1 दिन में दो तिथियां होने से इस बार शारदी नवरात्र 8 दिन की मनाई जाएगी। जैसा कि 9 अक्टूबर 2021 दिन शनिवार को तृतीया तिथि प्रातः 7:48 तक रहेगी तदुपरांत चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। जो अगले दिन यानी 10 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को प्रातः 5:01 तक रहेगी। अतः मां चंद्रघंटा एवं मां कुष्मांडा की पूजा 9 अक्टूबर को ही होगी। प्रिय पाठकों एवं प्रिय भक्तों को एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहूंगा कि घटस्थापना के साथ देवी मां का पूजन प्रारंभ किया जाता है। इसके लिए शुभ मुहूर्त का होना नितांत आवश्यक है। अनेकों भक्त ऐसे भी हैं जो कि मुहूर्त का ध्यान नहीं रखते । उन से मेरा विनम्र निवेदन है कि घट स्थापना शुभ मुहूर्त में ही करने का प्रयास करें। पाठकों एवं भक्तों की जानकारी हेतु बताना चाहूंगा कि इस बार सन 2021 में शारदीय नवरात्र में देवी मां के घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है दिनांक 7 अक्टूबर दिन गुरुवार प्रातः 6:18 से प्रातः 7:08 तक इस समय अवधि में घट स्थापना करने से नवरात्रि फलदाई होती है। और देवी मां प्रसन्न होती है। इस बात का विशेष ध्यान रखिएगा। अब प्रिय पाठकों एवं प्रिय भक्तों की सुविधा हेतु तिथि वार माता के नौ स्वरूपों की पूजा की तिथियों के बारे में जानकारी देना चाहूंगा। दिनांक 7 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार को मां शैलपुत्री की पूजा। दिनांक 8 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा। दिनांक 9 अक्टूबर 2021 दिन शनिवार माता चंद्रघंटा एवं माता कुष्मांडा की पूजा होगी। दिनांक 10 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को मां स्कंदमाता की पूजा। दिनांक 11 अक्टूबर दिन सोमवार को मां कात्यायनी की पूजा। दिनांक 12 अक्टूबर 2021 को मंगलवार के दिन मां कालरात्रि की पूजा। दिनांक 13 अक्टूबर दिन बुधवार को महागौरी की पूजा। दिनांक 14 अक्टूबर सन 2021 दिन गुरुवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी और माता के नौ स्वरूपों की पूजा पूर्ण हो जाएगी। इसके बाद दिनांक 15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को दशमी तिथि के दिन व्रत पारण होगा। इस दिन को विजयादशमी एवं दशहरा कहते हैं। अब यदि बात करें नवरात्र पर्व की कथाओं की तो हमारे हिंदू धर्म शास्त्रों में नवरात्रि के दो पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर नाम का एक राक्षस था। महिषासुर का अर्थ है महिष+ असुर महिष भैंस को कहते हैं और असुर दैत्य को अत: ऐसा दानव जो भैंसे की आकृति का था जो ब्रह्मा जी का बड़ा भक्त था। कई वर्षों तक तपस्या करने से उसने ब्रह्मा जी को प्रसन करके एक वरदान प्राप्त कर लिया था। इस वरदानके अनुसार उसे कोई देवता एवं राक्षस या पृथ्वी पर रहने वाला कोई मनुष्य मार नहीं सकता। वरदान प्राप्त होते ही वह बड़ा क्रूर और निर्दई हो गया था और तीनों लोकों में अपना आतंक फैलाने लग गया था। उसके इस आतंक से परेशान होकर सभी देवी देवताओं ने त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा विष्णु महेश के साथ मिलकर मां भगवती के शक्ति के रूप में दुर्गा को जन्म दिया। इन नौ स्वरूप वाली माता और महिषासुर के बीच 9 दिनों तक भयंकर एवं घमासान युद्ध हुआ । दसवे दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया। एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले और रावण के साथ युद्ध में जीत के लिए भगवती मां शक्ति की देवी मां की आराधना की थी। भारतवर्ष के सुदूर रामेश्वरम में जो भारत और लंका के बीच में स्थित है। इस पवित्र स्थान पर 9 दिनों तक माता की पूजा की। पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी की भक्ति से प्रसन्न होकर नवदुर्गा ने प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम को लंका में विजय प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था। दसवे दिन भगवान श्रीराम ने लंका नरेश रावण को युद्ध में हराकर उसका वध किया और लंका पर विजय प्राप्त की। इस दिन को विजयादशमी अथवा दशहरे के रूप में मनाया जाता है। लेखक श्री पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल ( उत्तराखंड)

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