माघ मास में गुरु पुष्य योग का महत्व- क्या कहते हैं पंडित प्रकाश जोशी नैनीताल

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माघ मास में गुरु पुष्य योग का महत्व, अभिजित मुहूर्त को नारायण के सुदर्शन चक्र के समान शक्ति शाली माना गया है, ऐसे ही नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है, पुष्य नक्षत्र और इस दिन बनने वाले शुभ मुहूर्त का प्रभाव अन्य मुहूर्त की तुलना में सर्वश्रेष्ठ माना गया है, विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य आरम्भ करना है तो पुष्य नक्षत्र सर्वश्रेष्ठ है, पुष्य नक्षत्र का सर्वाधिक महत्व तबबढजाताहै जब ठीक उसी नक्षत्र के दिन रविवार या गुरु वार हो, गुरु वार को गुरु पुष्य योग बनता है, जो मुहूर्त ज्योतिष में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में से एक है, पुराणों के अनुसार माना जाता है कि देवताओं के गुरु ब्रहस्पति देव इसी नक्षत्र में पैदा हुए थे, पुराणों में कहा जाता है कि, ब्रहस्पति प्रथमंजायमान:तिष्यंनक्षत्रं अभिसं बभूव जबकि नारद पुराण के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मा जातक महान कर्म करने वाला, धार्मिक विविध कलाऔ का ज्ञाता और सत्य वादी होता है, वैसे तो यह योग वर्ष में कोई बार आता है, परन्तु माघ मास में यह बहुत प्रभावी होता है, ग्रह आरम्भ नयाँ व्यापार, कारखाने स्थापित करने आदि सभी कार्य में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, आरम्भ काल से ही इस योग में किये गए सभी कार्य शुभ फलदायी कहे गए हैं, किन्तु माँ पार्वती जी के विवाह के समय शिव जी से मिले श्राप के परिणाम स्वरूप पाणिग्रहण संस्कार के लिए यह योग वर्जित माना जाता है, पैसे की कमी दूर करने के लिए नारियल को धन के स्थान पर रखकर गुरु पुष्य योग में स्थापित किया जाता है, किसी ज्ञाता पुरोहित द्वारा विधिवत् पूजा करने से उस व्यक्ति के घर में कभी भी पैसे की कमी नहीं रहती है, इस वर्ष अट्ठाइस जनवरी को है ऐसा योग, जो सूर्योदय से मध्य रात्रि तक है, धन्यवाद🙏 पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल

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