मकर संक्रांति को होते हैं इस पावन स्थल पर यज्ञोपवीत संस्कार(जनेऊ संस्कार) और चूड़ाकरण संस्कार–पंडित प्रकाश जोशी

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देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल जनपद स्थित नैनीताल शहर से 26 किलोमीटर दूर एवं भीमताल से 4 किलोमीटर दूरी पर एवं काठगोदाम से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह झील सौंदर्य से भरपूर है। इस झील का आकार और इसकी सुंदरता इसे सभी झीलों से अलग बनाती है। नौकुचिया ताल (नौ कोने वाला ताल) अर्थात यह झील 9 कोने वाली है इसलिए इसे नौकुचिया ताल कहते हैं। यदि इसके पौराणिक नाम की बात करें तो इसे सप्त सरोवर कहते हैं।
समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 1220 मीटर है। इस गहरी एवं स्वच्छ झील में कुल 9 कोने हैं झील की लंबाई 983 मीटर है और चौड़ाई 693 मीटर तथा गहराई 40.3 मीटर है। यह झील एक आकर्षक घाटी में स्थित है। यहां का मुख्य आकर्षण मछली पकड़ना एवं विभिन्न प्रकार के पक्षियों को निहारना है। यहां आने वाले सैलानीयों के लिए नौकायन की पर्याप्त व्यवस्था है। इस झील के एक भाग में कमल ताल भी है जहां पर्याप्त मात्रा में कमल के फूल देखने को मिलते हैं।
यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि इस झील के पास 9 भाइयों ने ध्यान किया था। वह ताल के 9 कोनों में बैठकर अदृश्य रूप से ध्यान किया करते थे। कोई भी एक कोने से दूसरे कोने में नहीं देख सकता था। आज भी लोग इस झील के 9 कोनों को एक साथ नहीं देख सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर किसी ने इन सभी 9 कोनों को एक साथ देख लिया तो या तो वह राजा बन जाता है या उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
दूर दूर से लोग तो यहां आते ही रहते हैं। इसके अतिरिक्त मकर संक्रांति के दिन यहां दूर-दूर से लोग यज्ञोपवीत संस्कार ( जनेऊ संस्कार) एवं चूड़ाकरण संस्कार हेतु यहां आते हैं।

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