मौनी अमावस्या पर मौन का अर्थ- पंडित प्रकाश जोशी

ख़बर शेयर करें

मौनी अमावस्या पर विशेष मौन का अर्थ होता है चुप्पी अर्थात मौनव्रत, इस दिन मौनव्रत रखा जाता है, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखा जाये तो कम बोलने से भी ऊर्जा नष्ट होने से बच जाती है, माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, इसबार यह 11 फरवरी 2021 को पड रही है, इस दिन गुरु वार और गज केसरी योग वर्षों बाद पड़ रहा है, इससे पूर्व सन् 2014 में यह योग था, अब आप गज केसरी का अर्थ भी समझ लैं गज माने हाथी और केसरी माने सोना अर्थात अत्यधिक धन दौलत, देने वाला, इस प्रकार शुभ दिन और अच्छे योग में होने के कारण यह अमावस्या शुभ फल देने वाली है, ऐसा कहा जाता है कि पितरों का श्राद्ध और उनके तर्पण के लिए यह दिन बहुत शुभ होता है, पितरों को याद करने से हमें उनका आशिर्वाद मिलता है, इस दिन प्रातः उठ कर पवित्र नदियों में स्नान करना भी उत्तम रहता है, सबसे महत्वपूर्ण इस दिन मौनव्रत रखने से मनुष्य का विकास होताहै, आध्यात्मिक एवं सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, पुराणों के अनुसार इस दिन से द्वापरयुग का शुभारंभ हुआ था, हालांकि इस दिन से कोई नया कार्य आरम्भ नहीं किया जाता है, क्योंकि यह युग तिथि कही जाती है, जिस तरह चार युग सतयुग त्रेता द्वापर और कलियुग है उनके आरम्भ की चार युग तिथियाँ है, इन चार युग तिथियौ में कोई भी नया कार्य आरम्भ करना वर्जित है, खैर जो भी है यहाँ विषय वस्तु मौनी अमावस्या है, अब आप देखै क्या वस्तुओं का दान इस दिन करना चाहिए, इस दिन तिल, सूखी लकड़ी, गर्म कपड़े कम्बल आदि दान करने चाहिए, एक महत्वपूर्ण बात यहभी है कि जिन जातकों की कुन्डली में चन्द्रमा नीच का हो उन्हें इस दिन सफेद वस्तुओं का दान जैसे कि दूध, चावल, खीर मिश्री, बतासे आदि दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है,

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

👉 हमारे Facebook पेज़ को लाइक करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page