खास खबर-देहरादून का गौरव है झंडा मेला-डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला दून विश्वविद्यालय देहरादून

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देश में अनेक महात्मा हुए। जिन्होंने समाज और देश को बहुत कुछ दिया। दून को भी एक ऐसा महात्मा मिलाए जिसने द्रोणनगरी को अपनी तपस्थली बना लिया और वो सब दिया जिसकी इसे जरूरत थी। पंजाब में जन्मे गुरु रामराय महाराज में बचपन से ही अलौकिक शक्तियां थीं। उन्होंने अल्पायु में ही असीम ज्ञान अर्जित कर लिया था। उनके सामाजिक कार्यों से समाज को नई दिशा भी मिली। सिखों के सातवें गुरु हरराय महाराज के ज्येष्ठ पुत्र गुरु रामराय महाराज ने वर्ष 1675 में चैत्र मास कृष्ण पक्ष की पंचमी के दिन दून में कदम रखा था। ठीक एक वर्ष बाद 1676 में इसी दिन उनके सम्मान में एक बड़ा उत्सव मनाया गया। यहीं से झंडेजी मेले की शुरूआत हुई। जो कालांतर में दूनघाटी का वार्षिक समारोह बन गया। यह वह दौर थाए जब देहरादून छोटा.सा गांव हुआ करता था। तब मेले में पहुंचने वाले लोगों के लिए भोजन का इंतजाम करना आसान नहीं था। इसी को देखते हुए श्री गुरु रामराय महाराज ने ऐसी व्यवस्था बनाई कि दरबार की चौखट में कदम रखने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा न लौटे। इसके लिए उन्होंने दरबार में सांझा चूल्हे की स्थापना की।देश में अनेक महात्मा हुए। जिन्होंने समाज और देश को बहुत कुछ दिया। दून को भी एक ऐसा महात्मा मिलाए जिसने द्रोणनगरी को अपनी तपस्थली बना लिया और वो सब दिया जिसकी इसे जरूरत थी। पंजाब में जन्मे गुरु रामराय महाराज में बचपन से ही अलौकिक शक्तियां थीं। उन्होंने अल्पायु में ही असीम ज्ञान अर्जित कर लिया था। उनके सामाजिक कार्यों से समाज को नई दिशा भी मिली। यह श्री गुरु राम राम का प्रभाव ही था कि उन्हें मुगल बादशाह औरंगजेब ने हिंदू पीर यानी महाराज की उपाधि दी थी। छोटी.सी उम्र में वैराग्य धारण करने के बाद वह संगतों के साथ भ्रमण पर निकल पड़े और भ्रमण के दौरान ही देहरादून आए। यहां खुड़बुड़ा के पास गुरु साहिब के घोड़े का पैर जमीन में धंस गया और उन्होंने संगत को यहीं पर रुकने का आदेश दिया। तब औरंगजेब ने गढ़वाल के राजा फतेह शाह को उनका पूरा ख्याल रखने का आदेश दिया। महाराज जी ने चारों दिशाओं में तीर चलाए और जहां तक तीर गएए उतनी जमीन पर अपनी संगत को ठहरने का हुक्म दिया। गुरु रामराय महाराज के यहां डेरा डालाने के कारण इसे डेरादून कहा जाने लगाए जो बाद में डेरादून से देहरादून हो गया। झंडे मेले की शुरूआत में पंजाब और हरियाणा से ही संगतें दरबार साहिब पहुंचती थीं। लेकिनए धीरे.धीरे झंडेजी की ख्याति देश.दुनिया में फैलने लगी। हर दिन झंडेजी के दर्शनों को श्रद्धालुओं की भीड़ उमडऩे लगी और इसी के साथ विस्तार पाने लगा दरबार साहिब के आंगन में खड़ा सद्भाव का सांझा चूल्हा। आज भी यहां हर दिन हजारों लोग एक ही छत के नीचे भोजन ग्रहण करते हैं। झंडा मेले के दौरान यह तादाद लाखों में पहुंच जाती हैए इसलिए अलग.अलग स्थानों पर लंगर चलाने पड़ते हैं। लंगर की पूरी व्यवस्था दरबार की ओर से ही होती है।मेले में झंडेजी पर गिलाफ चढ़ाने की परंपरा है। चैत्र में कृष्ण पक्ष की पंचमी के दिन पूजा.अर्चना के बाद पुराने झंडेजी को उतारा जाता है और ध्वजदंड में बंधे पुराने गिलाफए दुपट्टे आदि हटाए जाते हैं। दरबार साहिब के सेवक दहीए घी व गंगाजल से ध्वज दंड को स्नान कराते हैं। इसके बाद शुरू होती है झंडेजी को गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया। झंडेजी पर पहले सादे ;मारकीन केद्ध और फिर सनील के गिलाफ चढ़ाते हैं। सबसे ऊपर दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है। पवित्र जल छिड़के जाने के बाद श्रद्धालु रंगीन रुमालए दुपट्टे आदि बांधते हैं। दून में कोविड.19 की सेकेंड वेब पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होने वाली है। एक तरफ इस बार 12 राज्यों से आने वाले लोगों पर नजर रखने की चुनौती है तो दूसरी तरफ हरिद्वार का कुंभ मेला और देहरादून का झंडा मेला भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। हालांकि इन दोनों मेलों में बिना कोविड नेगेटिव रिपोर्ट के एंट्री बैन करने की बात कही गई हैए लेकिन इसके बावजूद जिस तरह से भीड़ जुटने लगी हैए वह आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकती है। हरिद्वार कुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत थर्सडे को होने जा रही हैए जबकि देहरादून का झंडा मेला फ्राइडे को शुरू होगा। प्रशासन की ओर से गाइडलाइन जारी कर दी गई हैंए लेकिन इन गाइडलाइन का पालन करवाना बड़ी चुनौती होगी। दोनों मेलों के लिए भीड़ जुटनी शुरू हो चुकी है और अगले कुछ दिन इस भीड़ में और ज्यादा बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। कोरोना से पूरी दुनिया संघर्ष कर रही है। इन हालात में श्रद्धालुओं को झंडे जी के मेले में नियम.कायदों का गंभीरता के साथ पालन करने की जरूरत है उत्तराखंड में वेडनसडे को 293 पॉजिटिव केस सामने आये। जबकि 118 रिकवर हुए। देहरादून में सबसे ज्यादा 171 और हरिद्वार में 70 पॉजिटिव केस सामने आये। राज्य में अब एक्टिव केसेज की संख्या बढ़कर 1863 हो गई है। चार पेशेंट की डेथ के बाद कोविड.19 से मरने वालों की संख्या 1717 हो गई है। राज्य में वेडनसडे को इंफेक्शन रेट 1ण्86 परसेंट रहा। अब तक का इंफेक्शन रेट 3ण्66 परसेंट है।दून का झंडा मेला 345 साल का गौरव बड़ी कोविड.19 से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। हालांकिए कोरोना के चलते इस बार संगतों में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित नजर आ रही है।

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उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर कार्य कर चुके हैं वर्तमान में दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।

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