‘भारतीय हिमालयी क्षेत्र में संरक्षण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तीन दिवसीय वेबिनार का किया गया उद्घाटन

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गोविन्द बल्लभ पन्त राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी-कटारमल में चल रहे ‘सतत विकास हेतु हिमालयी जैव विविधता का मुख्य धारा में समायोजन’ परियोजना के अन्तर्गत ‘भारतीय हिमालयी क्षेत्र में संरक्षण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान साधन व्यक्तियों के पुनः अभिमुखीयकरण के लिए तीन दिवसीय वेबिनार का आज दिनांे 23-03-2021 को उद्घाटन किया गया। इस वेबिनाम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय विद्यालयों में जैव विविधता और उसके सतत् उपयोग के प्रसार हेतु शिक्षक ज्ञान साधन व्यक्तियों को पुनः अभिमुखित करना तथा क्षेत्र में शिक्षण प्रणाली के साथ तालमेल और नेटवर्क विकसित करना है। जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग पर उचित रूप से संवाद करने की आवश्यकता को देखते हुए तथा संरक्षण शिक्षा में आउटरीच को बढ़ावा देने के लिए इस वेबीनार का आयोजन किया गया है।

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कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ0 आई0डी0 भट्ट ने सभी प्रतिभागियों तथा सम्मानिक अतिथियों का स्वागत किया तथा इस वेबीनार की रूप रेखा तथा उद्देश्यों से सभी लोगों को अवगत कराया। डाॅ0 भट्ट ने बताया कि वेबिनार में तीन दिवसीय तीन तकनीकी सत्र होने हैं, जिसमें विभिन्न विद्वजनों द्वारा जैव विविधता एवं उसके महत्व, जैव विविधता का आंकलन, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं एवं संकट, कृषि एवं पशु जैव विविधता तथा प्रभाव एवं अनुकूलन के विषयों पर चर्चा की जाती है। डाॅ0 भट्ट ने संस्थान में विगत वर्षों में चले ‘‘हिमालयी जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी’’ की अवधारणा तथा अन्य संरक्षण कार्यक्रमों से सभी प्रतिभागियों को अवगत करवाया। डाॅ0 भट्ट ने इस सभी कार्यक्रमों की उपलब्धियों को भी प्रतिभागियों से साझा किया।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए संस्थान के निदेशक डाॅ0 आर0एसव रावल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संरक्षण शिक्षा की शुरूआत तथा उसके विभिन्न आयामों से सभी लोगों को अवगत कराया। डाॅ0 रावल ने हिमालय की समृद्ध जैव-विविधता तथा उस पर विगत वर्षों में बढ़ते संकटों को ध्यान में रखते हुए संरक्षण शिक्षा के महत्व के बारे में बताया तथा जैव-विविधता संरक्षण व उसके सतत उपयोग के लिए इस वेबिनार की अवधारणा की महत्ता को सभी प्रतिभागियों से साझा किया। डाॅ0 रावल ने संरक्षण शिक्षा में शिक्षक ज्ञान साधन व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी सभी लोगों के साथ साझा किया कि इस वेबिनार के बाद क्षेत्र के सभी विद्यालयों के विद्यार्थियों को जैव- विविधता संरक्षण तथा उसके सतत उपयोग पर ज्ञान-वर्धन करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगें।
डाॅ राजेन्द्र डोभाल, डायरेक्टर जनरल, यूकोस्ट ;न्ब्व्ैज्द्ध ने संरक्षण शिक्षा की आउटरीच को बढ़ाने के सबसे पहले जैव विविधता तथा उसके संरक्षण की आवश्यकता को ज्ञान साधन व्यक्तियों से साझा करने की बात कही। डा. डोभाल ने जैव विविधता को समझने के लिए प्रजातियों की पहचान के ज्ञान को सबसे महत्वपूर्ण बताया तथा जैव-विविधता संरक्षण व उसके सतत उपयोग से जुड़े हुए कई उदाहरणों को प्रतिभागियों से साझा किया। डाॅ0 डोभाल ने संरक्षण शिक्षा का विद्यालयों में प्रसार करने को जैव-विविधता संरक्षण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
डाॅ0 डोबाल ने सुझाव दिया कि शुरूआत के लिए हम उत्तराखण्ड के एक सबसे ज्यादा जैव-विविधता समृद्ध जिले के स्कूलों में एक माॅडल के रूप में इको क्लबों की स्थापना करें जहाँ एक शिक्षक रिसोर्स पर्सन के द्वारा वह क्लब शुचारू रूप से चले, यह सुनिश्चित किया जाए।
डाॅ0 डोबाल ने शिक्षण प्रणाली के नेटवर्क को हिमालयी क्षेत्र में विकसित करने के लिए सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को महत्वपूर्ण बताया। इसकी शुरूआत के लिए डाॅ0 डोबाल ने उत्तराखण्ड, सिक्किम तथा मेद्यालय राज्यों को चिन्हित करने का सुझाव दिया।
उद्द्याटन समारोह के समापन पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ0 के0 चन्द्रशेकर ने सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम से जुड़ने के लिए धन्यवाद किया तथा डाॅ0 राजेन्द्र डोबाल जी को आश्वस्त कराया कि उनके सभी बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना के उद्देश्यों तथा लक्षित परिणामों को पूर्ण करने की पूरी कोशिश रहेगी।
उद्द्याटन कार्यक्रम के पश्चात सभी शिक्षक रिसोर्स पर्सन ने अपना परिचय दिया। परिचय के पश्चात तकनीकी सत्रों की शुरूआत हुई जिसमें पहले तकनीकी सत्र में संस्थान के वैज्ञानिक डाॅ0 आई0डी0 भट्ट ने जैव विविधता के अवलोकन, डाॅ0 विक्रम नेगी ने जैव विविधता के पारिस्थितिकीय महत्व तथा आरोहि संस्था के डाॅ0 पंकज तिवारी ने जैव विविधता के आर्थिक महत्व, मूल्य वर्धन एवं आजीविका क्षमता पर सभी प्रतिभागियों से विचार विमर्श किया।
कार्यक्रम में संस्थान से डाॅ0 जे0सी0 कुनियाल, डाॅ0 मिथिलेश सिंह, डाॅ0 हर्षित पन्त, डाॅ0 सुबोध ऐरी, डाॅ0 वीना पाण्डेय, श्री रवि पाठक, श्री कुलदीप जोशी, श्री दीप तिवारी, श्री बसन्त सिंह आदि उपस्थित थे तथा जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन केन्द्र के शोधार्थियों के साथ ही उत्तराखण्ड राज्य के सभी जिलों से जुड़े लगभग 40 शिक्षक रिसोर्स पर्सन उपस्थित रहे।

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