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गुरु पूर्णिमा पर विशेष। गुरु का स्थान भगवान से भी बड़ा माना जाता है। गुरु पूर्णिमा के शाब्दिक अर्थ से ही पता लगता है की आज के दिन गुरुजनों का आदर और सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसीलिए इसे गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। हमारे हिंदू धर्म में अनेक कवियों ने भी गुरु की महिमा गाई है। गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।। कबीर दास जी ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है की यदि गुरु और भगवान एक साथ खड़े हो तो सर्वप्रथम प्रणाम किसको करें क्योंकि गुरु ने भगवान तक पहुंचने का मार्गदर्शन किया है अतः गुरु भगवान से भी बढ़कर है। यहां तक कि कवि ने कहा है की। सब धरती कागज करूं लेखनी सब वनराई सात समुद्र की मसि करूं गुरु गुण लिखा न जाए।। अर्थात सारी पृथ्वी के बराबर कागज हो सारी धरती में जितने भी पेड़ हैं उन सब की लेखनी अर्थात कलम बनाई जाए और सात समुद्रों की स्याही बनाई जाए तब भी इसके बावजूद भी गुरु की महिमा को गाना कम पड़ता है। इस बार सन् 2021 में 23 जुलाई शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। वेदों का ज्ञान देने वाले और पुराणों के रचनाकार महर्षि वेदव्यास जी का जन्मदिन इसी तिथि को हुआ था। मानव जाति के कल्याण और ज्ञान के लिए महर्षि वेदव्यास जी का योगदान को देखते हुए उनकी जयंती को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजनों की पूजा की जाती है। जीवन को एक नई दिशा देने के लिए उनका आभार प्रकट करते हैं और उनके स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना करते हैं। मेरा सभी पाठकों से विनम्र निवेदन है की इस गुरु पूर्णिमा पर आप भी अपने गुरुजनों को शुभकामनाएं एवं बधाई संदेश भेज कर उनका आशीर्वाद ले सकते हैं। और आभार प्रकट कर सकते हैं गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परम ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः।। लेखक श्री पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल

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