कुविवि में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू

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नैनीताल -कुमाऊँ विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बनाये गए पाठ्यक्रमों का अध्ययन कराया जाएगा। इसके लिए नई शिक्षा नीति के तहत आगामी सत्र से पाठ्यक्रम निर्धारण एवं क्रियान्वयन हेतु कुमाऊँ विश्वविद्यालय में तीन दिन की कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री एवं रिसर्च डिग्री के आधार पर स्नातक के विषयों के पाठ्यक्रम तैयार किए जाने पर विस्तृत में चर्चा की गई।विश्वविद्यालय द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। इसको लेकर प्रशासनिक भवन में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें सभी निदेशकों, संकायाध्यक्षों एवं विभागाध्यक्षों के द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यशाला में प्रथम दिवस विज्ञान संकाय, द्वितीय दिवस कला संकाय एवं तृतीय दिवस कॉमर्स, मैनेजमेंट, तकनीकी एवं एग्रीकल्चर संकाय के पाठ्यक्रमों पर चर्चा की गई। कार्यशाला में उत्तराखंड राज्य में नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने वाली कमेटी के चेयरमैन कुलपति प्रो० एन०के० जोशी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होगी। इससे छात्र-छात्राओं की अधूरी या छूटी पढ़ाई व्यर्थ नहीं जाएगी। विद्यार्थियों में बहुआयामी प्रतिभा का विकास होगा। नई शिक्षा नीति में कौशल विकास, विषयों के चुनने में सहजता, ऑनलाइन कोर्सेज को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्नातक पाठ्यक्रमों के पैटर्न में व्यापक परिवर्तन किया जा रहा है। अब छात्र- छात्राओं की एक या दो वर्ष की पढ़ाई आगे की पढ़ाई छोड़ने पर व्यर्थ नहीं जाएगी। छात्र- छात्राओं को एक वर्ष की पढ़ाई करने पर सर्टिफिकेट, दो वर्ष पूरा करने पर डिप्लोमा तथा तीन वर्ष पूरा करने पर स्नातक की डिग्री एवं चार वर्ष पूरा करने पर स्नातक (शोध सहित) की डिग्री तथा पांच वर्ष पूरा करने पर स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त होगी। इससे अब छात्र- छात्राओं की अधूरी पढ़ाई व्यर्थ नहीं जाएगी। तीन विषय वाले सभी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम बीए, बीकॉम, बीएससी में सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) आधारित नवीन पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2022- 23 से लागू होगा।

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नए पैटर्न के अनुसार विद्यार्थी प्रवेश के समय अपने संकाय से दो मुख्य विषयों का चुनाव करेगा और तीसरा मुख्य विषय अपने संकाय से अथवा किसी भी संकाय से चयनित कर सकता है। विद्यार्थी द्वितीय, तृतीय वर्ष में मुख्य विषय बदल सकता है। अथवा उनके क्रम में परिवर्तन कर सकता है, परंतु वह एक वर्ष के बाद ही विषय परिवर्तित कर सकता है। स्नातक स्तर के प्रत्येक विद्यार्थी को प्रथम दो वर्षों के प्रत्येक सेमेस्टर में तीन क्रेडिट का एक कौशल विकास कोर्स करना होगा। परीक्षा देने के लिए पूर्व नियमानुसार 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी।

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