राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने शांतिकुंज स्वर्ण जयन्ती वर्ष के अवसर पर ‘नारी सशक्तिकरण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से किया प्रतिभाग

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राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने बुधवार को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में गायत्री तीर्थ-शांतिकुंज स्वर्ण जयन्ती वर्ष के अवसर पर ‘नारी सशक्तिकरण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि मैं अपने सम्बोधन का आरम्भ स्वयं को सशक्त दिखाती टोक्यो ओलम्पिक 2021 की उन महिलाओं का जिक्र करते हुए करना चाहुँगी जिनको किसी भी मंजिल और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शायद ही कभी निःशक्तता का अनुभव हुआ होगा। महिला सशक्तीकरण को दर्शाते अब तक के ओलम्पिक खेलों की श्रृंखला में सर्वाधिक पदक महिला खिलाड़ियों की वजह से भारत को मिले। महिलाओं पर मुझे यह कहते  हुए गर्व हो रहा है कि नारी सशक्त हैं। जिन्होंने देश का मान बढ़ाया है। इसके अलावा भी राजनीति के शीर्ष स्थान पर रहकर महिलाएँ अपनी श्रेष्ठता, क्षमता व प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। वैदिककाल में भी नारियों का स्थान महत्वपूर्ण था। कह सकते हैं आज नारी कोई अबला नहीं बल्कि सबला है। नारी उतनी ही साहसी है, जितना की पुरूष। नारियों ने समय-समय पर अपने अदम्य साहस का परिचय बखूबी दिया है। नर और नारी मनुष्य के ये दो रूप हैं और दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। नारी पुरूषों की प्रतिद्वन्दी नहीं बल्कि पूरक है।  राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि दुर्भाग्यवश नारियों को लेकर समय-समय पर समाज में उपजे दकियानुसी विचारों के कारण नारियों के मनोबल, आत्मबल को कमजोर करने का कुत्सित प्रयास किया जाता रहा, जिसके कारण महिलाएँ अपने को कमजोर समझती रहीं। उनकी शक्ति, सामर्थ्य व क्षमता को कमत्तर आंकने की भूलें की जाती रही हैं और इसका भारी खामियाजा पूरे समाज व राष्ट्र को समय-समय पर भुगतना पड़ा है। राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि जब राजाराम मोहन राय, ईश्वरचन्द्र विद्या सागर, दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानन्द, महर्षि अरविन्द एवं युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जैसे कई महान समाज सुधारकों व विचारकों ने महिलाओं की ऐसी दशादेखी तो उन्होंने आगे बढ़कर महिलाओं को उन कुरीति की जंजीरों से बाहर निकाला और जागरूक किया। इनके भागीरथ प्रयास से नारियाँ अपनी प्रगति में बाधा की जंजीरों को तोड़ती हुई आज बहुत आगे निकल चुकी हैं। नारी सशक्तिकरण को लेकर स्वामी विवेकानन्द ने ठीक ही कहा है कि मातृभूमि एवं नारी जाति के प्रति कर्तव्यभाव, सम्मानभाव एवं नारी जाति के स्वयं जागरूक होने से ही हमारे देश का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। जिस देश में, जिस जाति में स्त्रियों का सम्मान नहीं, उसकी शक्ति, सामर्थ्य व प्रतिभा विकसित करने के प्रयास-पुरूषार्थ व अवसर नहीं वह देश, वह जाति कभी बड़ी नहीं हो सकती, विकसित नहीं हो सकती। राज्यपाल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण को लेकर युगऋ़षि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार भी बड़े प्रासंगिक हैं। उनकी स्पष्ट धारणा है कि विश्व की आधी जनसंख्या नारी है। आधी जनसंख्या व बच्चे नारी के ही साथ हैं। यदि उनकी स्थिति गई-गुजरी रही, तो समाज अपंग जैसी स्थिति में रह जायेगा। समाज को अपंगता की स्थिति से बचाने हेतु नारी जागरण आवश्यक है, नारी सशक्तिकरण आवश्यक है। राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने अपने निजी अनुभव भी कार्यक्रम में साझा किये। बताया कि आगरा की मेयर रहते हुये किसी बात को लेकर बहुत परेशान थी उस समय गायत्री परिवार से ही जुड़े एक भाई ने कहा क्यों डरती हो, आगे आने वाला समय महिलाओं का ही है। उस एक वाक्य ने उन्हें इतनी शक्ति दी कि उस समस्या का सामना किया और समस्या पर जीत हासिल की। उन्होंने अपनी सफलता के लिए अपने पिता की आधुनिक विचारधारा का भी जिक्र किया कि किस प्रकार उनको आगे बढ़ाने में पिता और पति की भूमिका अहम रही।राज्यपाल ने कहा कि बिना महिलाओं की तरक्की और सशक्तिकरण के देश की तरक्की संभव नहीं। सशक्तिकरण से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें वह योग्यता आ जाती है जिससे वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। नारी सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे हैं जहाँ महिलायें, परिवार और समाज के साथ समन्वय करके अपने निर्णयों की निर्माता स्वयं हो। आज नारियाँ खेल, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार, शासन-प्रशासन, राजनीति आदि हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर कामयाबी के नित्य नये कीर्तिमान गढ़ रही हैं। परिणाम स्वरूप हमारा समाज व राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता जा रहा है।  राज्यपाल ने कहा कि सत्य यह भी है कि नारी सशक्तिकरण के पूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करना अकेले सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। नारियों को स्वयं अपने अधिकारों व अवसरों के प्रति जागरूक होना होगा। पुरूषों को आगे आकर नारियों को सशक्त करने में अपनी सार्थक व सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। विभिन्न सामाजिक, आध्यात्मिक संगठनों को भी इसमें अपनी बड़ी भूमिका निभानी होगी। मुझे इस बात का आनंद है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार जैसे संगठन विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों के द्वारा नारी सशक्तिकरण हेतु बड़े ही सार्थक व सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि शिक्षा नारी सशक्तिकरण का सबसे प्रभावशाली साधन है। मुझे इस बात की खुशी है कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शिक्षा और संस्कार के माध्यम से छात्राओं को गढ़े जाने व सशक्त करने के अभिनव प्रयोग, प्रयास चल रहे हैं। यहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों में 60 प्रतिशत संख्या छात्राओं की है।इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति डॉ0 चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव एवं प्राध्यापकगण, छा़त्र-छात्राएं उपस्थित थे। 

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