उत्तराखण्ड में भू कानूनों को पुनर्भाषित एवम् पुनर्व्याख्यायित करने कि तत्काल आवश्यकता: एक आत्ममंथन” विषय पर ‘ ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबीनर का किया आयोजन

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राजनीति शास्त्र विभाग ,राजकीय महाविद्यालय भतरोजखान अल्मोड़ा ने ‘उत्तराखण्ड में भू कानूनों को पुनर्भाषित एवम् पुनर्व्याख्यायित करने कि तत्काल आवश्यकता: एक आत्ममंथन” विषय पर ‘ ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबीनर का आयोजन किया – मुख्य अतिथि श्री हिमांशु थपलियाल , संस्थापक ए बेटर टॉमोरो वेलफेयर सोसायटी ,चमोली ने कहा उत्तराखण्ड का अपना निजीकृत एवम् व्यक्तिगत कानून हो अन्यथा वर्तमान भू कानून के संशोधन के अंतर्गत उत्तराखण्ड की संस्कृति ही नहीं बल्कि डेमोग्राफी /जनसांख्यिकी को बदल सकती हैराजनीति शास्त्र विभाग ,राजकीय महाविद्यालय भतरोजखान आदरणीय प्राचार्य एवम् संरक्षक प्रो सीमा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एवम् समन्वयक एवम् प्रभारी राजनीति विज्ञान विभाग , डॉ केतकी तारा कुमैय्या के नेतृत्व में दिनांक 10.07.2021″ विषय उत्तराखण्ड में भू कानूनों को पुनर्भाषित एवम् पुनर्व्याख्यायित करने कि तत्काल आवश्यकता: एक आत्ममंथन पर ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबीनर का आयोजन ‘उत्तराखण्ड कि माटी बोले संवाद श्रृंखला ‘ के अंतर्गत किया गया जिसमे मुख्य अतिथि श्री हिमांशु थपलियाल , संस्थापक ए बेटर टॉमोरो वेलफेयर सोसायटी ,चमोली ने शिरकत की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवम् मुख्य वक्ता हिमांशु थपलियाल , संस्थापक ए बेटर टॉमोरो वेलफेयर सोसायटी है , जिला संयोजक ,चमोली अखिल भारतीय साहित्य परिषद है एवम् पूर्व में एबीवीपी की प्रदेश कार्यकारिणी एवम् विभाग प्रमुख चमोली के महत्वपूर्ण पद पर रह चुके है । एक ओजस्वी वक्ता के साथ ही ये उत्तराखंड हित हेतु अपने सक्रियता के लिए जाने जाते है और उत्तराखण्ड युवा हित हेतु अपने छात्र जीवन से संलग्न रहे है|
अपने वक्तव्य में इन्होंने भू कानूनों की पृषठभूमि के साथ ही हिमाचल प्रदेश के भू कानूनों की विस्तृत चर्चा की और उसी तर्ज पर उत्तराखण्ड मे भी एक स्वतंत्र एवम् मजबूत भू कानून की मांग रखी। साथ ही इन्होंने वर्तमान में भू कानूनों के संशोधन 143 (क) एवम् 154(2) की समीक्षा करते हुए उनके पुनरावलोकन की मांग की जो कि भविष्य में भू माफिया को बढ़ावा देगा और सस्ती दरों में कृषकों को अपनी ज़मीन बेचने के लिए बाध्य कर देगा। साथ ही यह जिस प्रकार भूमि की खरीदारी पूर्व मे जो 12.5 एकड़ थी वो अब गैर उत्तराखंडी के लिए असीमित कर दी गई है जिससे यह संभावना है कि यह वीरान है चुके गांव के गांव खरीदे जा सकेंगे जो कि अंत में उत्तराखण्ड को अधर में रख देगा । इसलिए यह कानून एवम् इसके तहत किए गए संशोधन उत्तराखण्ड की संस्कृति के लिए ही नहीं बल्कि डेमोग्राफी /जनसांख्यिकी को बदल कर रख देगा ।
प्रतिभागियों में प्राचार्य कोटाबाग , प्रो नवीन भगत, डॉ एस सी पचौरी, ,डॉ रूमान सिंह , डॉ एस सी टम्टा ,डॉ नीलम गुप्ता डॉ बी डी जोशी ,डॉ संजीव कुमार , तथा तकनीकी सहयोग के लिए लक्ष्य पांडेय सहित कई शोधार्थियों ,सामाजिक कार्यकर्ताओं, एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। इसमें उत्तराखण्ड समेत पांडिचेरी, असम, हरियाणा ओडिशा, वेस्ट बंगाल , मणिपुर। कर्नाटक , महाराष्ट्र, राजस्थान , महाराष्ट्र , मध्य प्रदेश सहित 127 से ऊपर प्रतिभागियों ने शिरकत की ।
वेबिनार के अंत मे समन्वयक एवम् प्रभारी राजनीति विज्ञान विभाग डॉ केतकी तारा कुमैया ने प्राचार्य सीमा श्रीवास्तव, मुख्य अतिथि श्री हिमांशु थपलियाल, प्रभारी प्राचार्य डॉ एस के सिंह , प्राध्यापको एवम् सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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