ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल में डीएसटी सचिव प्रो. अभय करंदीकर का प्रेरणादायक संबोधन

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भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव प्रो. अभय करंदीकर का एक प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर ग्राफिक एरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) कमल घनशाला ने मुख्य अतिथि प्रो. करंदीकर का गर्मजोशी से स्वागत एवं सम्मान किया।

कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. अभय करंदीकर के प्रधान निजी सचिव श्री सुशील कुमार, डीएसटी सचिव के सलाहकार श्री अनुज कुमार त्रिपाठी, सैंपिज सेमी और सांख्य लैब्स के सह-संस्थापक एवं सीईओ श्री पराग नाइक के साथ श्री गिरीश कुलकर्णी और श्री आर.के. पाठक शामिल रहे। विश्वविद्यालय की ओर से सभी अतिथियों का पौधे भेंट कर स्वागत किया गया।

अपने संबोधन में प्रो. अभय करंदीकर ने पिछले एक दशक में भारत द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में की गई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में अनुसंधान गतिविधियों की गति तेज हुई है और यह देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि अकादमिक शोध और उद्योग के लिए उपयोगी तकनीकों के विकास के बीच अभी भी एक अंतर है, जिसे पाटने के लिए अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) जैसी राष्ट्रीय पहलों और गहन प्रौद्योगिकी (Deep-Tech) नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के भविष्य को आकार देने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

प्रो. करंदीकर ने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों में देश में यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या 12 से बढ़कर लगभग 125 हो गई है, जिससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि उद्यमिता, तकनीकी विकास और सरकार की सहयोगी नीतियों के कारण संभव हो पाई है।

सत्र के दौरान प्रो. अभय करंदीकर ने उपस्थित छात्रों और शोधार्थियों के प्रश्नों के उत्तर दिए तथा अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत प्रभावी शोध परियोजना प्रस्ताव तैयार करने के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। उन्होंने स्पष्ट दृष्टिकोण, सुव्यवस्थित उद्देश्य और केंद्रित कार्यान्वयन को सफल शोध प्रस्ताव की आधारशिला बताया। साथ ही उन्होंने स्टार्टअप और नवाचार आधारित परियोजनाओं के लिए भारत सरकार की विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में भीमताल परिसर के निदेशक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शोध को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह सत्र अकादमिक जगत, सरकार और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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