23वें दिन भी जारी नेहा बोरा का जल-आधारित अनशन, स्वास्थ्य बेहद नाजुक
नैनीताल से अंकिता मेहरा की रिपोर्ट
नई दिल्ली/पिथौरागढ़ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की रहने वाली और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की पीएचडी शोधार्थी नेहा बोरा पिछले 23 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर केवल पानी के सहारे अनशन पर हैं। समर्थकों के अनुसार, नेहा ने छात्रों की मांगों को लेकर अपना भविष्य और करियर दांव पर लगाते हुए यह कदम उठाया है।
अनशन के लगातार जारी रहने से उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जंतर-मंतर पर उनकी स्वास्थ्य जांच कर रहीं चिकित्सक डॉ. अंजलि छाबड़िया के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण नेहा का ब्लड शुगर स्तर काफी कम हो गया है और उनकी शारीरिक क्षमता भी तेजी से कमजोर हुई है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
समर्थकों का कहना है कि नेहा का वजन 8 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें वाशरूम जाने के लिए भी व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ रहा है। उनका यह भी दावा है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, लंबे समय तक भोजन न मिलने से अन्य गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं की आशंका भी जताई जा रही है।
फिलहाल नेहा का अनशन जारी है और समर्थक उनकी मांगों पर शीघ्र समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।


