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योग दर्शन को इनसे बेहतर शायद ही किसी ने समझा हो
डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड
भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर योग जिसके बल पर आज दुनिया स्वस्थ जीवन जी रही है। दुनियाभर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। साल 2015 में भारत की पहल के बाद इंटरनेशन योगा डे मनाने की शुरुआत हुई है। योग की उत्पत्ति भारत में लगभग कई हजार साल पहले हुई थी। योग वैदिक दर्शन की छह प्रणालियों में से एक है। भारत में योग की शुरुआत हजारों साल पहले महान संत और ऋषियों ने की थी। लेकिन योगा अब सिर्फ साधुओं, संतों तक ही सीमित नहीं है, ये हमारी दैनिक जीवन का हिस्सा है। योग विज्ञान और इसकी तकनीकों ने जीवन को फिर से जीने की नई दिशा दी है। योग आज चिकित्सा विज्ञान का हिस्सा है। इस योगा डे हम आपको भारत के ऐसे योगगुरु जिन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में योगा को बढ़ावा दिया है। बचपन से लेकर किशोरावस्था तक बेहद खराब स्वास्थ्य से जूझते रहे। खराब सेहत की वजह से वो अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पाए। उनका कमजोर और बीमारी से ग्रसित शरीर दोस्तों के बीच हमेशा मजाक का विषय बना रहता था। मगर एक समय ऐसा भी आया जब इन्हीं बी.के.एस अयंगर ने अपने इतने प्रशंसक बनाए कि उनकी योग पद्धति ‘अयंगर योग’ के नाम से प्रचलित हुई। कर्नाटक के छोटे से गांव बेल्लूर में पैदा हुए अयंगर दुनियाभर में ‘फादर ऑफ माडर्न योगा’ के नाम से मशहूर हुए भारतीय योगगुरु का बर्थ डे में इसलिए गूगल ने आज का डूडल उनको समर्पित किया है। इस डूडल में योग गुरु अलग-अलग योग की मुद्राओं में दिख रहे है। यह उनके शरीर और मन पर शानदार कंट्रोल और डिसिप्लिन को दर्शाता है। आयंगर भारत के अग्रणी योगगुरु है। टाइम मैगजीन ने 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगो की सूची जारी की थी, जिसमें आयंगर का नाम भी शामिल था। आयंगर ने जिन लोगों को योग सिखाया, उनमें जिद्दू कृष्णमूर्ति, जयप्रकाश नारायण, येहुदी मेनुहिन जैसे नाम सम्मिलित हैं। आयंगर को आधुनिक ऋषि के रूप में जाना जाता है। कई देशों में उनकी 100 से अधिक शाखाएं स्थापित की। उन्होने आयंगर योग की स्थापना की, जो विश्व विख्यात है। उनका जन्म 14 दिसम्बर 1918 को हुआ था और देहांत 20 अगस्त 2014 को हुआ। 2002 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से तथा 2014 में पद्म विभूषण से नवाजा था। उनका पूरा नाम बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार है। योग के ज्ञान को अपने तक सीमित न रख कर पूरी दुनिया में फैलाना चाहते थे। इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने लंदन, स्वीट्जरलैंड, पेरिस और कई देशों की यात्रा की और योग का प्रचार किया। उन्होंने कई अनुसंधानों के बाद इस योग के तरीकों का आविष्कार किया था। ऐसे महान योग गुरु की जिंदगी को जानने के लिए गुरु पूर्णिमा के दिन से बेहतर कोई दिन नहीं हो सकता।
लेखक द्वारा उत्तराखण्ड सरकार के अधीन उद्यान विभाग के वैज्ञानिक के पद पर का अनुभव प्राप्त हैं, वर्तमान में दून विश्वविद्यालय dk;Zjr है.

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