पवित्र माघ मास पर क्या कहते हैं पंडित प्रकाश जोशी जानिए

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आजकल पवित्र माघ मास लगा है इस मास मै सूर्य देव उत्तरायण मै प्रवेश करते हैं रवि उत्तरायण मै किया गया दान स्नान जप तप सब अक्षय फल देने वाला होता है, जो लोग इस मास में व्रत न कर पाये वो त्रिमाघी यानि तीन दिन व्रत करके पुण्य को प्राप्त करंगे और सभी पानी का प्रांयक्षित करने का उन्हें सुअवसर प्राप्त होगा माघ मास में तिल दान का बहुत महत्व है तिल से बनी वस्तु यै जैसे रेवड़ियां गजक आदि दान कर नी चाहिए तिल से बने भोजन को ग्रहण करना चाहिए और तिल में घी मिला कर ओम वेणी माधवाय नम: इस मंत्र से अग्नि में आहुति देने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति होती है ।

इस मास में तिल और गुड का बहुत महत्व है धर्म ग्रन्थों के अनुसार इस मास में यदि विधि पूर्व क भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाये तो सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और माघ मास की ऐसी महिमा है कि इसमें जहाँ कहीं भी जल हो वह गंगा जल के समान ही है फिर भी प्रयाग काशी नैमिषारण्य कुरुक्षेत्र हरिद्वार तथा अन्य पवित्र तीर्थ में स्नान का बड़ा महत्व है, हिन्दू पंचाग के अनुसार चंन्द्र वर्ष का ग्यारह वां मास है माघ, पुराणों में माघ मास के महात्म्य का वर्णन मिलता है।

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इसका नाम माघ इसलिए रखा गया कि यह मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा से प्रारंभ होता है, चन्द्र मास के महिनौ के नाम नक्षत्रों पर आधारित है जैसे पौष का पुष्य जेष्ठ का जेष्टा कार्तिक कर्तिका आदि आदि, पद्मपुराण में माघ मास में कल्पवास के दौरान स्नान, दान, और तप के महत्ता के विस्तार से वर्णन मिलता है माघ मास की शुक्ल पंचमी से वसंतरृऋतु का आरंभ होता है और तिल चतुर्थी, रथ सप्तमी भीष्म अष्टमी आदि व्रत आरम्भ होतें है, सबसे महत्वपूर्ण ये है कि माघ कृष्ण द्वादशी को यम ने तिल का निर्माण किया और दशरथ ने उन्हें प्रथ्वी पर ला कर खेतों में बोया अतैव मनुष्य को उस दिन उपवास रखकर तिल से बनी वस्तुओं को दान कर ना चाहिए,,

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