टीबी से बचाव ही टीबी का है इलाज-भरत गिरी गोसाई

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विश्व टीबी दिवस 1982 मे टीबी के जीवाणु की खोज करने वाली डॉ० रॉबर्ट कोच के जन्म दिवस पर 24 मार्च को पूरे विश्व मे मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व मे टीवी संक्रमण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

वर्ष 2021 का थीम: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2021 का विश्व टीबी दिवस की थीम “द क्लॉक ट्रैकिंग” रखा है।

टीबी रोग क्या है? टीबी फेफड़ों में होने वाला एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो कि
माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु से फैलता है। यह मुख्यतः फेफड़ों को संक्रमित करता है। टीबी को तपेदिक अथवा क्षयरोग रोग भी कहा जाता है।

टीबी मौत का प्रमुख कारण: टीबी संक्रमण दुनिया भर मे मौत का एक प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरे विश्व मे 2 अरब से ज्यादा लोग टीबी से संक्रमित है। प्रतिवर्ष दुनिया मे 6 से 7 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त होते है। जिनमे से लगभग 25 लाख लोगो की मौत हो जाती है। भारत मे भी टीबी के मरीज अत्यधिक है।

टीबी की अवस्थाएं: टीबी रोग सुप्त व सक्रिय दोनो अवस्था मे होता है। सुप्त अवस्था मे टीबी का जीवाणु निष्क्रिय अवस्था मे रहने के कारण बीमारी के कोई लक्षण नही दिखाई देते है, जबकि सक्रिय अवस्था मे संक्रामक घातक अवस्था मे होता है। सक्रिय अवस्था मे टीबी के जीवाणु ड्रॉपलेट न्यूक्लीआई के रूप मे संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति मे जाकर उसे संक्रमित कर सकता है।

टीबी के प्रमुख लक्षण: लगातार खांसी का होना (3 हफ्ते), खांसी के साथ खून का आना, सांस फूलना, ज्यादा थकान का अनुभव होना, छाती मे दर्द होना, ज्यादा ठंड महसूस होना, रात मे पसीना आना आदि टीबी के प्रमुख लक्षण है।

टीबी का कारण: अत्यधिक धूम्रपान करना, टीबी के मरीजो का खुले मे थूकना, संक्रमित हवा मे सांस लेना, मरीज को खून चढ़ाते समय सावधानी न बरतना आदि टीबी के प्रमुख कारण है।

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टीबी के प्रकार: संक्रमण के अनुसार टीबी को दो प्रकार से वर्गीकृत किया गया। 1. पल्मोनरी टीबी: जब माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस फेफड़े को संक्रमित करता है तो वह पल्मोनरी टीबी कहलाता है। लगभग 90% से ज्यादा मामले में टीबी का बैक्टीरिया फेंफड़ों को प्रभावित करता है। 2.एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी: अगर टीबी का जीवाणु फेंफड़े के अलावा शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है तो उसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते है। छोटे बच्चों, एचआईवी से ग्रस्त लोगो मे इस प्रकार की टीबी होने की अधिक संभावना पाई जाती है। एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी को प्रभावित अंगो के अनुसार नाम दिया गया है, जैसे लसीका प्रणाली मे होने वाली टीबी लिम्फ नोड टीबी, तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली मैनिन्जाइटिस टीबी, हृदय झिल्ली (पेरीकार्डियम) मे होने वाली टीबी को पेराकार्डिटिस टीबी, जननांगों को प्रभावित करने वाली टीबी जेनिटोयूरिनरी टीबी कहलाता है।

टीबी की जांच: टीबी के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर द्वारा रोगी को टीबी को जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, जो निम्न है- 1. स्पुटम/अन्य फ्लूइड टेस्ट- इस टेस्ट मे संक्रमित व्यक्ति के बलगम व अन्य फ्लूड को स्लाइड मे लेकर उसका स्मीयर बनाकर लैब मे एसिड फास्ट स्टेनिंग की जाती है। इस जांच में 2 से 3 घंटे का समय लगता है। 2. स्क्रीन टेस्ट: इस टेस्ट मे मरीज के शरीर मे इंजेक्शन द्वारा दवा डालकर 48 से 72 घंटे बाद टीबी की पुष्टि की जाती है। 3. जीन एक्सपर्ट टेस्ट- नवीनतम तकनीकी युक्त आधुनिक विधि से 2 घंटे में संक्रमित व्यक्ति के बलगम द्वारा टीबी का पता लगाया जाता है। यह कार्टिरेज बेस्ड न्यूक्लीक एसिड एम्फ्लिफिकेशन आधारित टेस्ट है।

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टीबी के उपचार मे प्रयुक्त एंटीबायोटिक दवाईयां: टीबी के उपचार मे सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाईयां है: आइसोनियाजिड, रिफाम्पिसिन, सीप्रोफ्लॉक्सासिन, लेवोफ्लॉक्सासिन, मोक्सीफ्लोक्सासिन, अमिकासिन, कैनामायसिन और कैप्रीयोमायसिन इत्यादि।

टीबी का रोकथाम एवं नियंत्रण: शिशुओं के बैसिलस कैल्मेट-ग्यूरिन (बीसीजी) का टीकाकरण कराना चाहिए। बच्चों मे यह 20% से ज्यादा संक्रमण होने का जोखिम कम करता है। साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, जितनी जल्दी हो सके उपचार शुरू किया जाए, डॉट्स दवाइयों का पूरा कोर्स डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए। ताजे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फैटयुक्त आहार का सेवन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अगर व्यक्ति की रोक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो भी टीबी रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है।

टीबी से बचाव हेतु वैश्विक प्रयास: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘स्टॉप टीबी’ अभियान चलाकर टीबी के जीवाणु को खत्म करने के लिए वैश्विक पहल की है।

टीवी से बचाव हेतु भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास: भारत सरकार वर्ष 2025 तक देश में टीबी को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिसके लिए चरणबद्ध तरीके से ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ का आयोजन किया जा रहा है।

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