ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल में यूपीसीएल के 30 कर्मचारियों के लिए दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के माध्यम से सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी एवं सरल बनाने पर दिया जोर
भीमताल, 22 अक्टूबर। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल), उत्तराखंड सरकार के 30 कर्मचारियों के लिए ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई टूल्स एवं एप्लीकेशंस’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा एआई आधारित उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना है, ताकि सरकारी कामकाज में दक्षता बढ़ाने, नियमित कार्यों को सरल बनाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में रवि कुमार राजोरा, अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल (ईडीसी), हल्द्वानी (नैनीताल) उपस्थित रहे। उनके साथ भवाली के उपखंड अधिकारी विद्या भूषण जोशी सहित यूपीसीएल के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर भीमताल परिसर के निदेशक ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) कमल घनशाला के उस विजन का उल्लेख किया, जिसके तहत कुमाऊं क्षेत्र के लोगों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यों को अधिक स्मार्ट, सरल और प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों से विश्वविद्यालय की सुविधाओं और शैक्षणिक संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने तथा कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक कार्यों में लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पहल दोनों संस्थानों के बीच सीखने, सहयोग और पारस्परिक विकास के दीर्घकालिक संबंधों को मजबूत करेगी।
मुख्य अतिथि रवि कुमार राजोरा ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विभिन्न क्षेत्रों के कार्य करने के तरीकों को बदलने की व्यापक क्षमता है। उन्होंने प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एआई का सर्वोत्तम उपयोग तभी संभव है, जब इसे मानवीय बुद्धिमत्ता, विवेक और आलोचनात्मक सोच के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला में सीखी गई तकनीकों को व्यावहारिक रूप से अपनाकर कार्यक्षमता, उत्पादकता और दैनिक कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने का आग्रह किया।
कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में भीमताल परिसर के निदेशक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव एआई और सरकारी प्रशासन में उनके व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावी प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के माध्यम से नियमित प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाया जा सकता है तथा आधिकारिक कार्यों में लगने वाले समय को कम करते हुए कार्यकुशलता बढ़ाई जा सकती है।
प्रो. अंकुर सिंह बिष्ट ने अपने सत्र में सुशासन और जनसेवा वितरण को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें डेटा के आधार पर बेहतर निर्णय लेने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं। साथ ही, उन्होंने तकनीक के जिम्मेदार उपयोग तथा मानवीय विवेक और आलोचनात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया।
प्रो. (डॉ.) नवीन तिवारी ने ‘चैटजीपीटी की सहायता से आधिकारिक दस्तावेज तैयार करना’ विषय पर सत्र आयोजित किया। उन्होंने प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करने की तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन करते हुए बताया कि चैटजीपीटी की मदद से आधिकारिक पत्र, परिपत्र, नोटिस, बैठक की कार्यवाही, रिपोर्ट और नीतिगत टिप्पणियों का प्रारूप तैयार किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के उचित उपयोग से प्रशासनिक दस्तावेजों की गुणवत्ता, सटीकता और कार्यकुशलता में सुधार किया जा सकता है।
वहीं, गोविंद सिंह जेठी ने ‘प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की तकनीकें’ विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करने, उन्हें बेहतर बनाने तथा प्रॉम्प्ट लिखते समय होने वाली सामान्य गलतियों से बचने के तरीकों पर चर्चा की। साथ ही, चैटजीपीटी के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सटीक, सरल और समयबद्ध बनाने के व्यावहारिक तरीके भी बताए।
कार्यशाला के पहले दिन एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की बुनियादी अवधारणाओं तथा उनके प्रशासनिक उपयोगों पर विस्तार से चर्चा हुई। दूसरे दिन प्रतिभागियों के लिए शासन और प्रशासन में एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर केंद्रित हैंड्स-ऑन सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सीखी गई तकनीकों को वास्तविक कार्यों में उपयोग करने पर विशेष जोर रहेगा।
कार्यशाला के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान के लिए डॉ. श्याम एस. कापड़ी, प्रो. (डॉ.) संदीप कुमार बुधानी और गोविंद सिंह जेठी के प्रयासों की सराहना की गई। यह कार्यशाला सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकी कौशल से सशक्त बनाने तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


