ज्योतिष गणना के अनुसार कैसा रहेगा नव वर्ष 2023 आइए जानते हैं ?

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अंग्रेजी पंचांग के अनुसार नव वर्ष 31 दिसंबर की मध्यरात्रि 12:00 बजे से प्रारंभ होता है जबकि हमारे हिंदू पंचांग की गणना नव वर्ष विक्रम संवत के चैत्र मास के पहले नवरात्र के दिन सूर्योदय से प्रारंभ माना जाता है। फिर भी बहुत से लोगों की उत्सुकता बनी रहती है कि नव वर्ष कैसा रहेगा इसी संदर्भ में प्रिय पाठकों को आज ज्योतिष गणना के अनुसार वर्ष 2023 कैसा रहेगा इस संबंध में ज्योतिष संबंधित कुछ जानकारियां देना चाहूंगा।
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष 2023 1 जनवरी 2023 रविवार को अश्विनी नामक नक्षत्र एवं सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ कन्या लग्न में प्रवेश करेगा। जहां एक ओर नव वर्ष का प्रारंभ सर्वार्थ सिद्धि योग में हो रहा है जो कि बहुत शुभ माना जाता है वहीं दूसरी ओर शनि गुरु और राहु अपनी राशि परिवर्तन भी करेंगे।
ग्रहों की गति के अनुसार वर्ष पर्यंत अनेकों प्रकार के संक्रमण रोग और प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप होने के कारण जन जन तक सरकार द्वारा देय लाभ पहुंचना कम संभव है। ग्रहों की गति के अनुसार ही न्यायालय के फैसले सरकारी कामकाज में भी कई प्रकार की रुकावटें पैदा करेंगे। आर्थिक गतिविधियों के परिणाम सत्ता पक्ष के प्रतिकूल होंगे।
न्याय के ग्रह शनि देव इस बार 30 वर्षों के बाद अपनी मूल राशि कुंभ राशि में प्रवेश करने वाले हैं। शनिदेव के संबंध में पाठकों को एक महत्वपूर्ण जानकारी देना चाहूंगा कि शनिदेव धीरे से चलने वाले ग्रह हैं शनि यानी कि (शनै शनै) धीरे धीरे ढाई वर्ष में अपनी एक राशि पूर्ण करते हैं और लगभग 30 वर्ष में 12 राशियों को पूर्ण कर अपनी मूल राशि में आ जाते हैं। इस समय शनि देव मकर राशि में विचरण कर रहे हैं शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही कई राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढय्या प्रारंभ हो जाएगी। नव वर्ष में 17 जनवरी 2023 को शनिदेव पूर्ण रूप से कुंभ राशि में आ जाएंगे। शनिदेव 13 जुलाई 2022 को वक्री होकर पुनः मकर राशि में प्रवेश कर गए तथा 17 जनवरी 2023 को पूर्ण रूप से कुंभ राशि में आ जाएंगे। शनि के राशि परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव उन राशि के जातकों पर होता है जिन पर शनि साढ़ेसाती या शनि की ढैया का असर रहता है। ऐसे जातकों को ज्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है शनि साढ़ेसाती काल में दुख ही नहीं सुख भी देते हैं। बल्कि सुख के दिन दुख के दिनों से ज्यादा होते हैं। बल्कि जन्म लग्न सूर्य लग्न चंद्र लग्न इन दिनों से ही जन्मपत्रिका के केंद्र भाव में या त्रिकोण भाव में शनि यदि स्थित हो तो अत्यंत अशुभ फल देने की स्थिति में आ जाते हैं। चंद्र राशि से चौथे और आठवें भाव में अगर शनि गोचर करें तो इसे भैया कहते हैं और इसके अशुभ फल प्राप्त होते हैं परंतु इस बार यह हो रहा है कि न केवल शनि राशि बदल रहे हैं बल्कि गुरु राहु और केतु अप्रैल के महीने की राशि बदल चुके हैं इसलिए इन ग्रहों के मिश्रित परिणाम प्राप्त होंगे।
पाराशरी विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्ष की गणना की जाती है जिसमें शनिदेव की महादशा 19 वर्ष मानी गई है शनि की महादशा के समय ही यदि साढ़ेसाती भी आ जाए तब परिणामों में तीव्रता आ जाती है अन्यथा बहुत कम। ज्योतिष में शनि को दंडनायक कहा गया है और यह कर्मों का फल प्रदान करते हैं। शनि की महादशा या साढ़ेसाती काल में व्यक्ति साधारण नहीं रह पाता बल्कि उसका उत्थान या पतन देखने को मिलता है।
नव वर्ष के दिन यदि पंचांग की गणना करें तो इस दिन पौष मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 30 घढ़ी दो पल अर्थात रात्रि 9:11बजे तक है यदि इस दिन के नक्षत्र की बात करें तो इस दिन अश्विनी नामक नक्षत्र 14 घड़ी दो पल अर्थात दोपहर 12:47 बजे तक है। यदि इस दिन के चंद्रमा की स्थिति जाने तो इस दिन चंद्रदेव पूर्णरूपेण मेष राशि में विराजमान रहेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण यदि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग की बात करें तो इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 7:10 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा।

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