ध्यानमयी अवस्था को अपने अंदर बनाए रखने की कला – कमलेश डी पटेल (दाजी), हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के मार्गदर्शक

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ध्यानमयी अवस्था को अपने अंदर बनाए रखने की कला – कमलेश डी पटेल (दाजी), हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के मार्गदर्शक

जब आप जीवन में किसी चीज में उत्कृष्टता प्राप्त करना चाहते हैं तब आप उस चयनित क्षेत्र में सतत सुधार के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। यही विकास है। तो विकास से हमारा क्या तात्पर्य है? विज्ञान में विकास रूप- रचना में बदलाव से सम्बंधित है जो वास्तव में हमारे नियंत्रण में नहीं है। जब हम मानवीय विकास की बात करते हैं तो वास्तव में हम अपनी चेतना के विकास की बात करते हैं।

मनुष्य के रूप में हमारी संरचना में शरीर, मन एवं आत्मा हैं। स्थूल शरीर पदार्थ के माँस व रक्त से निर्मित है। सूक्ष्म अथवा नक्षत्रीय शरीर ऊर्जा व स्पंदन है जिसे हम हृदय व मनस कहते हैं। और तीसरा शरीर यानी कारण शरीर आत्मा है जो हमारे अस्तित्व का केंद्र अथवा आधार है।

स्थूल शरीर इस जीवन में ज्यादा विकसित नहीं होता है। आत्मा भी अपरिवर्तनीय है। अतः जब हम एक बेहतर व्यक्ति बनना चाहते हैं तो असल में क्या विकसित होता है? वह सूक्ष्म शरीर यानी मनस है। सचेत विकास पूरी तरह से सूक्ष्म शरीर के चारों तरफ मौजूद परतों को हटाकर उसके शुद्धिकरण से सम्बंधित है। इसी तरह से हम अपनी चेतना के क्षेत्र का विकास व विस्तार करते हैं।

हमारे सूक्ष्म शरीर के चार प्रमुख कार्य होते हैं – चित्त यानी चेतना, मनस यानी सोचना, बुद्धि और अहंकार।वे एकसाथ मिलकर जिसे बनाते हैं उसे हम मन के रूप में जानते हैं। इन चारों में से यहाँ हम चेतना पर केंद्रित हैं और अन्य तीनों का अस्तित्व चेतना के क्षेत्र में ही है। चेतना एक चित्रकार के चित्रपट के समान है और उस चित्रपट पर प्रतिदिन अन्य तीनों सूक्ष्म शरीरों की भूमिकाएँ आयोजित होती हैं।

हमारे विकास की पराकाष्ठा पर चेतना, सोच, बुद्धि एवं अहंकार क्या बनेंगे? चेतना अपने आप विकसित नहीं होती है। यह अन्य तीन की मदद से विकसित होती है। बुद्धि विवेक में विकसित होती है, सोच अनुभूति में विकसित होती है और अहंकार प्रेममय निस्स्वार्थता में रूपांतरित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, चेतना एक स्थिर व संकीर्ण अवस्था से गतिशील व सार्वभौमिक स्वभाव में विस्तारित होती है।

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इसमें ध्यान हमारी मदद कैसे करता है? ध्यान के माध्यम से हम सूक्ष्म शरीर से इसकी सभी जटिलताओं को हटाकर इस रूपांतरण को संभव बनाते हैं जिससे मन शांत हो जाता है। एक परेशान व बेचैन मन तूफानी समुद्र की तरह होता है जो इच्छाओं व कामनाओं, चिंताओं, डरों और आदतों द्वारा अनेक दिशाओं में खिंचता रहता है – हमेशा अशांत व असंतुलित। वह विभिन्न प्रवाहों में बहकर बिखर जाता है, जबकि एक नियंत्रित व संतुलित मन केंद्रित रहता है और उससे सबका कल्याण होता है। जब हम ठीक से ध्यान करते हैं तब हमारा मन अधिक शुद्ध, सहज व हल्का बन जाता है। इस प्रकार हमारी चेतना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। तब हम अपने अस्तित्व के गहरे से गहरे स्तरों में जा पाते हैं जिससे हम अपने आंतरिक सामर्थ्य को उजागर कर पाते हैं।

तब हम सुबह के एक अच्छे ध्यान के फलस्वरूप प्राप्त ध्यानमयी अवस्था को पूरे दिन अपने साथ बनाए रखने की कला में माहिर हो जाते हैं ताकि हमारी चेतना का चित्रपट खराब न हो और तरोताजा व साफ रहे। फिर यह जटिलताओं, प्रतिक्रियाओं और भावनाओं से अशांत नहीं होती है जो अन्यथा हमारी आंतरिक शांति व आनंद को नष्ट कर देती हैं।

ऐसी शांतिपूर्ण अवस्था में विवेक विकसित होता है। विवेक प्राप्त होने से हम अपनी सभी क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग करते हैं। हम न्यूनतम निवेश से अधिकतम उत्पादन करते हैंय न्यूनतम कार्यवाही करके हम अधिकतम परिणाम प्राप्त करते हैं। अपने दैनिक जीवन में सब कुछ ऐसी ध्यानमयी अवस्था में करने से हम उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं और अपनी क्षमता के अनुरूप सर्वोत्तम बन सकते हैं।

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लेखक के विषय में

श्री कमलेश पटेल (दाजी) विश्वव्यापी हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट के अध्यक्ष एवं मार्गदर्शक हैं जो 160 देशों में लाखों हार्टफुलनेस अभ्यासियों को ध्यान करना सिखाते हैं और उनका मार्गदर्शन करते हैं। आध्यात्मिक गुरुओं की सौ साल पुरानी परम्परा के उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने से पहले दाजी तीन दशकों से भी अधिक समय तक न्यूयॉर्क शहर में औषधी-विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं। एक आधुनिक समय के गुरु की अनेक जिम्मेदारियों को निभाते हुए वे व्यापक रूप से यात्रा करते हैं और सभी जगह आध्यात्मिक जिज्ञासुओं की मदद करते हैं। संसार की महान आध्यात्मिक परम्पराओं और वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति आदर और जिज्ञासा के गहन भाव से चिन्तन करते हुए, उनकी शिक्षाएँ हार्टफुलनेस के पथ पर उनके निजी अनुभव का परिणाम हैं। वे अपना बहुत समय और ऊर्जा चेतना व अध्यात्म के क्षेत्र में शोध करने में बिताते हैं। वे इस विषय को वैज्ञानिक तरीके से समझाते हैं। यह एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है जो इस क्षेत्र में उनके अपने अनुभव एवं दक्षता से उपजता है। वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों श्द हार्टफुलनेस वेश् और श्नियति का निर्माणश् के लेखक हैं। वे कान्हा शांतिवनम् में रहते हैं जो हार्टफुलनेस का वैश्विक मुख्यालय है।

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