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आषाढ़ कृष्ण पक्ष संकष्टी चतुर्थी व्रत। आषाढ़ कृष्ण पक्ष संकष्टी चतुर्थी व्रत इस बार बड़े संयोग से रविवार को पड़ रहा है इस संयोग में पढ़ने से इसे रवि वती संकष्टी कहा जाता है। इसी कारण से कई गुना फलदाई बन जाती है रवि वती संकष्टी चतुर्थी। जिस प्रकार अमावस्या तिथि को सोमवार पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं ठीक इसी प्रकार संकष्टी चतुर्थी को यदि रविवार पड़े तो उसे रवि वती संकष्टी कहते हैं। हमारे ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा शुभ संयोग बहुत कम आता है। इससे कृष्ण पिंगला संकष्ट चतुर्थी भी कहा जाता है। इसमें यदि आपकी जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह कमजोर है तो सूर्य ग्रह को मजबूत करने के लिए भी आप रवि वती संकष्टी चतुर्थी व्रत कर सकते हैं। इस व्रत को करके आप भगवान सूर्य देव को जल अर्पण कर उन्हें प्रणाम करके विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की आराधना करें तो आपकी जन्मकुंडली में सूर्य द्वारा होने वाली हानियां समाप्त हो जाती है। और सुधि पाठकों को बताना चाहूंगा इस बार संकष्टि व्रत का शुभ मुहूर्त सन 2021 में 27 जून रविवार को शाम 3:54 से शुरू होगी और 28 जून 2021 को दोपहर 2:16 मिनट पर समाप्त होगी। और चंद्रोदय 27 जून 2021 प्रातः 10:03 पर होगा चंद्रमा की स्थिति पूर्णरूपेण मकर राशि में होगी श्रवण नक्षत्र एवं वैधृति योग है। संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा। संकष्टी चतुर्थी मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं। जिसमें से एक ऐसी मान्यता भी प्रचलित है की 1 दिन माता पार्वती एवं भगवान शिव नदी के किनारे बैठे हुए थे। अचानक ही माता पार्वती का मन चौपड़ खेलने का हुआ। लेकिन उस समय वहां पार्वती एवं शिव के अलावा और कोई तीसरा नहीं था ऐसे में कोई तीसरा व्यक्ति चाहिए था जो हार जीत का फैसला कर सके। इस वजह से दोनों ने एक मिट्टी की मूर्ति बनाकर उसमें जान फूंक दी। और उसे शिव पार्वती के बीच हार जीत का फैसला करने को कहा। चौपड़ खेल में पार्वती विजई हुई यह खेल लगातार चलता रहा। जिसमें चार बार माता पार्वती जीजी विजई हुई। लेकिन एक बार बालक ने गलती से पार्वती को हारा हुआ और शिव को विजई घोषित कर दिया। इस पर माता पार्वती क्रोधित हुई। और उस बालक को लंगड़ा बना दिया। बच्चे ने अपनी गलती की माफी भी मांगी लेकिन माता पार्वती उस समय क्रोधित थी। बालक की एक ना सुनी। और माता पार्वती ने कहा कि अब श्राप तो वापस नहीं लिया जा सकता लेकिन एक उपाय है। जो तुम्हें इससे मुक्ति दिला सकता है। और कहां की इस जगह पर संकष्टी के दिन कुछ कन्याएं पूजा करने आती हैं। तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और व्रत करना बालक ने वैसा ही किया बालक की पूजा से भगवान गणेश जी प्रसन्न होते हैं। और बालक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस कथा से यह मालूम होता है की गणेश जी की पूजा यदि पूरी श्रद्धा से की जाए तो सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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