औषधीय गुणोयुक्त कढ़ी पत्ता: आजीविका का बेहतर साधन

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आलेख: भरत गिरी गोसाई (वनस्पति विज्ञान) शहीद श्रीमती हंसा धनाई राजकीय महाविद्यालय अगरोड़ा धारमंडल टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड

कढ़ी पत्ता जिसे
सामान्यतः मीठा नीम भी कहा जाता है जोकि रूटेसी परिवार का सदस्य है जिसका वैज्ञानिक नाम मुराया कोईनीगि है। मीठा नीम के पत्ते का प्रयोग विशेषकर कढ़ी मे छौका लगाकर जायका बढ़ाने मे किया जाता है। इसलिए इन पत्तियो को कढ़ी पत्ता कहा जाता है। कढ़ी पत्ता पौध का उद्गम स्थान भारत माना गया है। भारत के अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, भूटान आदि हिमालयी क्षेत्रो मे 1500 से 2500 मीटर की ऊंचाई पर यह पौधा पाया जाता है। कढ़ी पत्ता पौधा की सामान्य ऊंचाई 2 से 5 मीटर तथा मुख्य तने की परिधि 10 से 16 सेंटीमीटर होती है। पत्तियों की लंबाई 20 से 30 सेंटीमीटर होती है। प्रत्येक पत्ता पर 24 पत्रक पाए जाते है जोकि भाला के आकार के लगभग 4.9 सेंटीमीटर लंबे व 1.8 सेंटीमीटर चौड़ी होते है।

पोषक तत्वो से भरपूर कढ़ी पत्ता: वैज्ञानिक अध्ययनो के अनुसार कढ़ी पत्ता के प्रति 100 ग्राम पत्तियों मे लगभग 108 किलो कैलोरी ऊर्जा, 18.7 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 6.1 ग्राम प्रोटीन, 6.4 ग्राम फाइबर, 830 मिलीग्राम कैल्शियम, 57 मिलीग्राम फास्फेट, 7 मिलीग्राम आयरन के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा मे विटामिन ए, बी, सी, तथा ई पाया जाता है।

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औषधीय गुणो से युक्त कढ़ी पत्ता: कढ़ी पत्ता मे अनेक औषधीय गुण पाए जाते है जिसमे एंटी-डायबिटीक, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-कोलेस्ट्रेलेमिक आदि गुण प्रमुख है। कढ़ी पत्ता का प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा मे जड़ी-बूटी के रूप मे औषधि निर्माण मे किया जाता है। कढ़ी पत्ता के नियमित सेवन से एनीमिया के खतरे को कम किया जा सकता है, ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल किया जा सकता है, पाचन शक्ति को बढ़ाया जा सकता है, ब्लड कोलेस्ट्रोल कम करने तथा वजन घटाने मे भी कढ़ी पत्ता सहायक है।

कढ़ी पत्ता का रोजमर्रा के जीवन मे उपयोग: कढ़ी पत्तियो का प्रयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों जैसे दाल, कढ़ी सांभर, पोहा आदि मे स्वाद एवं जायका बढ़ाने मे किया जाता है। इसके अलावा आम और ईमली की साथ इसके पत्तियो को पीसकर स्वादिष्ट और सुगंधित चटनी भी बनाया जाता है।

कढ़ी पत्ता पौध की खेती: वैसे तो कढ़ी पत्ता पौधा जंगलो अथवा बंजर भूमि मे पाया जाता है किंतु अत्यधिक औषधीय गुणो के कारण वर्तमान मे भारत के अलावा कई देशो मे इसकी खेती की जा रही है। कढ़ी पत्ता की खेती के लिए दोमट मिट्टी जिस का पीएच मान 6 से 7 के मध्य हो उपयुक्त माना जाता है। कढ़ी पत्ता पौध का रोपण बीज द्वारा किया जाता है। प्रतियेक फल मे एक बीज पाया जाता है जोकि 11 मिमी० लंबा और 8 मिमी० व्यास का होता है। प्रत्येक पौध मे फलो की संख्या प्रति समूह 32 से 80 होता है, जोकि आयताकार आकार के 1.4 से 1.6 सेंमी० लंबे तथा 1 से 1.5 सेंमी० व्यास के होते है। कढ़ी पत्ता की खेती के लिए दो से तीन जुदाईयां करके खेत को समतल किया जाता है। पर्याप्त मात्रा मे खाद का प्रयोग तथा नियमित रूप से सिंचाई करने से शीघ्र बीजो से अंकुरण होकर नया पौध का निर्माण होता है। परिपक्व व विकसित पतियो को निकालकर छायादार जगह मे सुखाकर वायुरोधी थैलियो मे पैकेजिंग अथवा शुष्क स्थान (कोल्ड स्टोरेज) मे भंडारित किया जाता है। किसानो द्वारा ₹150 से ₹300 प्रति किलोग्राम के भाव से बाजार मे कड़ी पत्तियां बेची जाती है।

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कढ़ी पत्ता स्वरोजगार व आजीविका का साधन:
केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारे यदि नीति बनाकर इस प्रकार के औषधीय पौधो की खेती को बढ़ावा दे तो यह किसानो एवं नौजवानो के लिए स्वरोजगार एवं आर्थिकी का बेहतर स्रोत बन सकता है।

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