लोअर मॉलरोड पर फिर उभरीं दरारें, आठ साल बाद भी नहीं पूरा हुआ धंसे हिस्से का स्थायी उपचार

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नैनीताल से अंकिता मेहरा की रिपोर्ट

नैनीताल। वर्ष 2018 में नैनीताल झील में समा गए लोअर मॉलरोड के ध्वस्त हिस्से का स्थायी उपचार आठ वर्ष बाद भी अधूरा है। इस बीच उपचाराधीन क्षेत्र से मल्लीताल की ओर सड़क पर नई दरारें उभरने लगी हैं, जिससे स्थानीय लोगों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।
करीब 25 मीटर लंबे धंसे हिस्से के स्थायी उपचार के लिए 3.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। शुरुआत में माइक्रो-पाइल ड्रिलिंग के दौरान तकनीकी दिक्कतों के चलते कार्य प्रभावित हुआ। बाद में ओडीईएक्स तकनीक अपनाकर निर्माण दोबारा शुरू किया गया, लेकिन इसके बावजूद परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी को लेकर हाल ही में व्यापार मंडल ने विरोध जताया था। इसके बाद कुमाऊं आयुक्त ने मौके का निरीक्षण कर कार्य में तेजी लाने और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के बाद काम में कुछ तेजी तो आई, लेकिन अब उपचार स्थल के आगे सड़क पर नई दरारें दिखाई देने से सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया कि लोअर मॉलरोड के करीब 330 मीटर हिस्से में आई दरारों का सर्वे एनएचपीसी से कराया गया है। पूरे क्षेत्र के स्थायी समाधान के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। फिलहाल एहतियात के तौर पर सड़क पर उभरी दरारों को भरने का कार्य जल्द कराया जाएगा।

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