पंतनगर विश्वविद्यालय में कुलपति चयन प्रक्रिया पर सवाल, आरोपित प्रोफेसर को इंटरव्यू के लिए बुलाने पर विवाद
गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी में कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कुलाधिपति स्तर पर कुलपति पद के लिए जिन उम्मीदवारों को इंटरव्यू/इंटरेक्शन हेतु आमंत्रित किया गया है, उनमें कृषि महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शिवेंद्र कश्यप का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि डॉ. कश्यप पर इसी विश्वविद्यालय से जुड़े एक प्रकरण में लगभग ₹10 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच फिलहाल लंबित है। ऐसे में उसी संस्थान में कुलपति जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक पद के लिए उन्हें इंटरव्यू हेतु बुलाया जाना चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. कश्यप ने आरोप पत्र को निरस्त कराने के लिए हाई कोर्ट ऑफ उतराखंड में रिट याचिका (S/B 146 of 2026) दायर की थी। बताया जाता है कि 18 मार्च 2026 को न्यायालय ने आरोप पत्र को निरस्त करने से इनकार करते हुए संबंधित नियोक्ता बोर्ड को नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जांच प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई।
इसके बाद जांच से जुड़े दस्तावेज, एजेंडा और अभिलेख विश्वविद्यालय बोर्ड के सदस्यों तथा शासन स्तर के अधिकारियों को भेजे जाने और निर्धारित समय सीमा में लिखित जवाब मांगे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ उसी संस्थान में वित्तीय अनियमितता जैसे गंभीर आरोपों की जांच जारी हो, तब उसे कुलपति पद के लिए इंटरव्यू में शामिल करना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, नैतिक विश्वसनीयता और बेदाग छवि भी अनिवार्य मानक होने चाहिए।
फिलहाल यह मामला उत्तराखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालय प्रशासन और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।


