ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल में ‘जेन एआई फॉर एवरीवन’ पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित

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भीमताल। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में ‘टेक टॉक’ पहल के अंतर्गत “जेन एआई फॉर एवरीवन” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान सह हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अमित आर. भट्ट द्वारा सभी संकाय सदस्यों के लिए संचालित किया गया।

सत्र के दौरान प्रो. भट्ट ने जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का विस्तृत और सरल परिचय देते हुए विशेष रूप से बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) की कार्यप्रणाली को समझाया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकासक्रम और इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हाल के वर्षों में हुई प्रगति का मुख्य कारण कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि है। इस संदर्भ में उन्होंने लॉगरिथमिक तालिकाओं के उपयोग के अपने अनुभव साझा किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पहले सीमित संसाधनों में भी जटिल समस्याओं का समाधान कैसे किया जाता था।

उन्होंने बड़े भाषा मॉडलों की कार्यप्रणाली को चरणबद्ध तरीके से समझाते हुए बताया कि कैसे एक इनपुट निर्देश (प्रॉम्प्ट) से शुरुआत होकर टोकनाइजेशन, पूर्णांक मैपिंग और एम्बेडिंग की प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम आउटपुट तैयार होता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ये मॉडल गलत या अपरिचित शब्दों को छोटे-छोटे अर्थपूर्ण भागों में विभाजित कर समझते हैं, जिसकी तुलना उन्होंने विद्यालय के दिनों में शब्दों के अभ्यास से की।

सत्र में “दक्षता कर (इफिशिएंसी टैक्स)”, टोकन सीमा, उत्तर संबंधी सीमाएं और “सुरक्षा तंत्र (सेफ्टी नेट)” जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की गई। उन्होंने ‘अटेंशन लेयर’ की भूमिका को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह अगला शब्द या टोकन निर्धारित करने में कैसे मदद करती है।

प्रो. भट्ट ने जेन-एआई के व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा कि इसके प्रभावी उपयोग के लिए बुनियादी समझ आवश्यक है। उन्होंने बड़े भाषा मॉडलों के माध्यम से प्रश्नोत्तरी और समस्या-आधारित मूल्यांकन जैसे नवाचारों की जानकारी दी, जो रटने के बजाय अवधारणात्मक समझ को बढ़ावा देते हैं। इस दौरान संकाय सदस्यों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए शिक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स जितने भी उन्नत क्यों न हों, छात्रों के समग्र विकास के लिए मार्गदर्शन, अनुभव और व्यक्तिगत सीख अत्यंत आवश्यक है।

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