नैनीताल के रंगकर्मियों के द्धारा एच०एस० राणा “बाबा” द्धारा लिखित नये नाटक “अंतिम युद्ध” का किया गया पाठ

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आज हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर नैनीताल के रंगकर्मियों के द्धारा एच०एस० राणा “बाबा” द्धारा लिखित उनके नये नाटक “अंतिम युद्ध” का पाठ किया गया.

प्रयोगांक नैनीताल के द्वारा हिंदी रंगमंच दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत नैनीताल के कळप्रेमियों द्वारा एच०एस० राणा “बाबा” द्धारा लिखित उनके नये नाटक “अंतिम युद्ध” का पाठ किया गया.
ये नाटक युद्ध की कुरुपता व उसके विभत्स स्वरुप को दिखाता है. ये नाटक उनके द्धारा सन् 1978 में लिखे गये नाटक ” चौराहे का मसीहा” का ही विस्तारित रुप है जिसका मंचन तब अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता, नैनीताल में किया गया था. इसमें अन्य कलाकारों के साथ भारतीय सिनेमा के अभिनेता स्व० श्री निर्मल पांडे व उनके बड़े भाई मिथिलेश पांडे ने भी अभिनय किया था.

इस कथानक को आगे ले जाकर नाटककार ने आज की तकनीक व परिस्थितियों के अनुसार से इस नाटक को आगे बढाया है जिसमें शासकों की सत्ता के प्रति लोलुपता व बेकसूर जनता के संहार से उपजा दर्द उभर कर आता है. आजकल की स्थिति में ये नाटक पूर्ण रुप से समसामयिक माना जा सकता है.

इस अवसर पर मिथिलेश पांडे, एच एस राणा, डी के शर्मा, मुकेश धस्माना, मनोज साह, मदन मेहरा, राजेश आर्या, उमेश कांडपाल आदि ने अपने अपने विचार प्रस्तुति किये.

हिंदी रंगमंच दिवस प्रतिवर्ष 3 अप्रैल को मनाया जाता है, जो 1868 में वाराणसी में शीतला प्रसाद त्रिपाठी द्वारा लिखित पहले हिंदी नाटक ‘जानकी मंगल’ के मंचन की याद दिलाता है। यह दिन हिंदी रंगमंच की समृद्ध विरासत, भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान और अभिनय कला के विकास का जश्न मनाने का अवसर है। इस अवसर पर भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, मोहन राकेश, जय शंकर प्रसाद, धर्मवीर भारती, रामधारी सिंह दिनकर, प्रेमचंद, बृजमोहन साह, गोविन्द बलभ पंत, हरिशंकर परसाई, मिथिली शरण गुप्त, भगवती चरण वर्मा, भीष्म साहनी मानव कॉल, आदि हिंदी साहित्यकार की रचनाओं पर चर्चा की गई. संचालन मिथिलेश पाण्डे द्वारा किया गया।

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