उत्तराखंड महिला मंच ने अंकिता हत्याकांड के सम्बन्ध में नगर के पत्रकारों से साथ की प्रेसवार्ता  

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नैनीताल से संध्या शर्मा की रिपोर्ट

आगामी 20 जुलाई 26 को अंकिता हत्याकांड की नैनीताल हाई कोर्ट में सुनवाई है। सजा याफ़्ता कैदी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर, अंकित उर्फ पुलकित गुप्ता को एडीजे कोटद्वार द्वारा आजीवन कारावास की सजा हुई है। अभियुक्तों ने लोअर कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की है।   
उत्तराखंड महिला मंच ने विविध जनसंगठनों को साथ लेकर धरना प्रदर्शन, सम्बन्धित अधिकारियों से मिलने, महापंचायत से लेकर सी बी आई कार्यालय, देहरादून में तालाबन्दी तक की है।उत्तराखंड महिला मंच अपने सहयोगी जन संगठनों के साथ अंकिता की इस लड़ाई को  निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए दृढ़ संकल्पित  है। हम सभी अवगत हैं कि अंकिता हत्याकांड को चार वर्ष बीत चुके हैं, प्रारम्भ से ही इस मामले में ढीलाई बरती गई । जनता के व्यापक आक्रोश और विरोध के कारण हत्यारों  की गिरफ्तारी हुई एवं ए डी जे कोर्ट कोटद्वार से सजा हुई है। शुरू से ही इस केस से जुड़े गम्भीर सवालों को नजरअन्दाज किया जाता रहा है। जैसे कि सबसे पहले घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने के लिए रिर्सोट में मुख्य रूप से अंकिता का कमरा व रिसेप्शन में बुलडोजर द्वारा तोड़‌फोड़ की गई। स्थानीय प्रशासन व पुलिस द्वारा वी आई पी के सवाल को भटकाया जाता रहा, जबकि अंकिता की लास्ट चैट में वी आई पी का जिक्र है। एवं पुलकित आर्य और अंकिता  दोनों के फोन का बरामद न होना।
 सोशल मीडिया के माध्यम से  वी आई पी का नाम सामने आने के बावजूद उन पर न तो मुकदमा कायम किया गया और  न ही उनसे कोई पूछताछ की गई। अंकिता के माता पिता तबसे लगातार हताश और निराश हैं। वह अपनी पुत्री के साथ हुए अन्याय से आहत हैं। उनके लिए भी  यह सवाल लगातार बना हुआ है। 7 जनवरी को माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड ने उन्हें बुलाकर उनकी मर्जी पूछी और आश्वासन दिया था कि उनकी बात मानी जाएगी। इसी संदर्भ में सी बी आई जांच की घोषणा भी की थी, लेकिन इस बात को छः माह बीत जाने के बावजूद कोई कार्यवाही सामने नहीं आई है। अभी तक अंकिता के माता-पिता से सीबीआई ने  कोई  सम्पर्क व पूछताछ  नहीं की है। इसका मतलब तो यही निकलता है कि सी बी आई  द्वारा कोई जाँच नहीं हो रही है। 
   इन चार सालों में उत्तराखण्ड की जनता लगातार आन्दोलनरत है।  सरकार और प्रशासन द्वारा साक्ष्यों को मिटाने और अपराधियों को संरक्षित किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा अंकिता के माता-पिता को बुलाकर पूर्ण आश्वासन क्यों दिया गया ? उनके पत्र को संज्ञान में न लेकर एक अन्य व्यक्ति के पत्र को आधार बनाकर सीबीआई जांच की संस्तुति क्यों दी गई? जबकि माता-पिता ने 7 जनवरी को ही मुख्यमंत्री को अपना पत्र सौंप दिया था।
     अभी तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिला है । हमारा मानना है कि अपराधियों को सजा में किसी प्रकार की छूट नहीं मिलनी चाहिए। उनका अपराध इसलिए भी बढ़ जाता है कि अंकिता अपने नियोक्ता के संरक्षण में थी,उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उसके नियोक्ता की बनती थी।उसे सुरक्षा प्रदान करने की बजाय उसे सुनियोजित साजिश के तहत नियोक्ता द्वारा कत्ल कर दिया गया।क्या अंकिता भंडारी का जुर्म यह था कि उसने रिसोर्ट मालिक के कहने पर किसी वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने को   ‘ना ‘ कहा ?  क्या महिलाओं की ‘ हां ‘और ‘ना ‘ का  कोई महत्व नहीं ? यहां महिला का सम्मान तो दूर उसे मानव ही कहां समझा गया ? अतः अपराधियों को जो आजीवन कारावास की सजा  निचली अदालत से मिली है  वह सजा मृत्युपर्यंत होनी चाहिए।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमा भट्ट, शीला रजवार, माया चिलवाल, कमला पंत, भावना भट्ट, राजीव लोचन साह, दिनेश उपाध्याय, चंपा उपाध्याय, गायत्री दारमवाल, विकल्प पांडे, संध्या शर्मा आदि उपस्थित रहे।

                   

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